मुजफ्फरनगर: तहसील परिसर में किसानों का 'हल्लाबोल', कैम्पा कोला फैक्ट्री और चकबंदी में भ्रष्टाचार को लेकर जमकर नारेबाजी
अधिकारियों पर लगा 'सुविधा शुल्क' और अवैध कब्जे के संरक्षण का आरोप; ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने घेरा एसडीएम कार्यालय
मुजफ्फरनगर। जनपद की सदर तहसील में सोमवार को किसानों के गुस्से का गुबार फूट पड़ा। प्रशासनिक कार्यशैली और भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद हुए किसानों ने तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। किसानों का आरोप है कि तहसील के चक्कर काट-काटकर उनकी चप्पलें घिस गई हैं, लेकिन बिना 'लेन-देन' के कोई जायज काम नहीं हो रहा है। विशेष रूप से एक बड़ी फैक्ट्री के जमीन अधिग्रहण और चकबंदी प्रक्रिया में हो रही धांधली ने आग में घी का काम किया है। भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ पहुंचे किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी पुश्तैनी जमीनों को इंसाफ नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के जिलाध्यक्ष निखिल चौधरी ने तहसील प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव सुवाहेड़ी में प्रस्तावित कैम्पा कोला फैक्ट्री की परियोजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। संगठन का दावा है कि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद चार किसानों की जमीन को अब तक कब्जा मुक्त नहीं कराया गया है। भाकियू नेताओं ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उपजाऊ कृषि भूमि को उद्योगपतियों के हवाले करने के लिए नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, जिससे किसान भूमिहीन और बेरोजगार होने की कगार पर हैं।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: गैस की किल्लत के बीच उपभोक्ताओं का भारी हंगामा, वेंडर पर लगा कालाबाजारी का आरोपसंगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। किसानों ने आरोप लगाया कि चकबंदी के नाम पर छोटे किसानों का शोषण किया जा रहा है और अनियमितताएं चरम पर हैं। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि कैम्पा कोला कंपनी का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोककर उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं की गई, तो भाकियू तोमर अपनी पूरी 'फौज' के साथ एसडीएम कार्यालय पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर देगी। किसानों का कहना है कि प्रशासन के संरक्षण के बिना इस तरह का भ्रष्टाचार संभव नहीं है।
धरने के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सदर तहसील में भारी पुलिस बल तैनात रहा। भाकियू तोमर की प्रमुख मांगों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, मुआवजे के वितरण में पारदर्शिता और विवाद सुलझने तक कंपनी का काम रोकने की मांग शामिल है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन किसानों के तेवरों को देखते हुए इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
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