एनसीआर व पश्चिमी यूपी में बढ़ता प्रदूषण बना स्वास्थ्य के लिए खतरा, मरीजों की संख्या में इजाफा
मुजफ्फरनगर। आज एनसीआर और पश्चिम उत्तर प्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस फूलना, दम घुटना, छाती में भारीपन, सांस खिंचकर आना, खांसी, घबराहट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सलाहकारों के अनुसार, कुछ छोटे-छोटे घरेलू उपाय अपनाकर प्रदूषण के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है और स्वयं को स्वस्थ रखा जा सकता है।
प्रदूषण से बचाव के आसान व असरदार उपाय
घर के अंदर व कमरों में अधिक ऑक्सीजन देने वाले पौधे रखें, जैसे— एलोवेरा, स्नेक प्लांट, स्पाइडर प्लांट, एरेका पाम, मनी प्लांट और तुलसी। सप्ताह में एक दिन इन्हें धूप में अवश्य रखें।
सोने वाले कमरे में कपूर रखने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है। घबराहट होने पर कपूर को 2-3 बार सूंघने से तुरंत राहत मिलती है।
सुबह के समय जब ऑक्सीजन लेवल अधिक होता है, उस समय शंख बजाने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।
हल्का व्यायाम करें और ऑक्सीजन की कमी महसूस होने पर कुछ समय उल्टा लेटें, इससे आराम मिलता है।
हमेशा गुनगुना पानी पिएं। रात में गुड़ खाकर दूध या गर्म पानी पीना फेफड़ों व नसों की सफाई में सहायक है।
हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाली सब्ज़ियों और फलों का सेवन करें— जैसे गाजर, चुकंदर और आंवले का रस।
गाय के घी का दीपक जलाने से भी आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा व शुद्धता बनी रहती है।
काली चाय की जगह आयुर्वेदिक चाय का प्रयोग करें। चीनी की जगह गुड़ या शक्कर का उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
स्टीम लेने से नाड़ियों में जमा प्रदूषण बाहर निकलता है और सांस लेना आसान होता है।
तुलसी का सेवन चाय या गर्म पानी के माध्यम से करें, इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग इन उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, तो प्रदूषण के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
— अवतोष शर्मा, स्वतंत्र लेखक
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