मुज़फ़्फ़रनगर में तकनीक के क्षेत्र में बीआईटी की ऊंची उड़ान, आईआईटीएम पुणे के साथ एमओयू से बदलेगी मौसम निगरानी की तस्वीर
संस्थान परिसर में स्थापित होगा 3डी-प्रिंटेड स्वचालित मौसम केंद्र, क्षेत्र के किसानों को फसल प्रबंधन में मिलेगी बड़ी मदद
मीरापुर (मुज़फ़्फ़रनगर)। क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भगवंत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) ने मौसम विज्ञान और सटीक पूर्वानुमान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस साझेदारी के तहत बी.आई.टी. परिसर में भारत की अत्याधुनिक 3डी-प्रिंटेड स्वचालित मौसम प्रणाली स्थापित की जा रही है।
केद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे की ओर से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिवसाई अजित दीक्षित एवं डॉ. थारा प्रभाकरन तथा बीआईटी की ओर से निदेशक डॉ. अनुराग विजय अग्रवाल ने इस महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार के ‘मिशन मौसम’ को मजबूती प्रदान करना और मौसम निगरानी नेटवर्क को ग्रामीण स्तर तक विस्तारित करना है।
3D प्रिंटेड तकनीक: 'मेक इन इंडिया' का शानदार उदाहरण
संस्थान में स्थापित किया जा रहा 'मेक इन इंडिया' की तकनीक के तहत यह मौसम केंद्र पूरी तरह से स्वदेशी और कम लागत वाली 3डी-प्रिंटेड तकनीक पर आधारित है। स्वचालित प्रणाली वाला यह स्टेशन सौर ऊर्जा से संचालित होगा, जो पर्यावरण के अनुकूल है। इसके माध्यम से तापमान, आर्द्रता, वर्षा की मात्रा, वायु गुणवत्ता, हवा की दिशा और गति जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े रियल-टाइम में दर्ज होंगे। मार्च माह से पूर्ण रूप से कार्यशील होने के बाद यह केंद्र सीधा डेटा भारत मौसम विज्ञान विभाग को प्रेषित करेगा।
विद्यार्थियों और किसानों के लिए वरदान
संस्थान प्रशासन के अनुसार, यह केंद्र केवल एक उपकरण नहीं बल्कि शोध का एक बड़ा केंद्र बनेगा। जहां इंजीनियरिंग के छात्र डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सेंसर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मौसम विश्लेषण का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। वहीं किसानों के लिए भी सटीक स्थानीय मौसम डेटा मिलने से क्षेत्र के किसानों को फसल प्रबंधन और आपदा पूर्व तैयारी में बड़ी मदद मिलेगी।
अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
डॉ. अनुराग विजय अग्रवाल ने बताया कि यह स्टेशन बी.आई.टी. को देश के चुनिंदा संस्थानों की श्रेणी में खड़ा कर देगा जो सीधे राष्ट्रीय मौसम ग्रिड से जुड़े हैं। यह पहल न केवल नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर सटीक पूर्वानुमान के माध्यम से सामाजिक लाभ भी सुनिश्चित करेगी।
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