मेरठ: अब्दुल्लापुर में गम और गुस्से का सैलाब, आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत पर सड़कों पर उतरा शिया समुदाय
मेरठ। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की शहादत की खबर ने मेरठ के अब्दुल्लापुर क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। रविवार को शिया समुदाय के सैकड़ों लोगों ने इज़राइल और अमेरिका की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया। 'आंखों में आंसू और दिल में गम' लिए प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर की और अमेरिका व इज़राइल के खिलाफ 'मुर्दाबाद' के नारे लगाए।
मासूमों और महिलाओं की आंखों में दिखा गहरा दुख
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हुए। कड़ाके की धूप और गमगीन माहौल के बीच प्रदर्शनकारियों के हाथों में खामेनेई साहब के पोस्टर और काले झंडे थे। इमाम बारगाह में आयोजित शोक सभा में माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया जब मौलाना मुजिबुल हसन ने आयतुल्लाह खामेनेई के जीवन और उनके संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खामेनेई साहब केवल एक नेता नहीं, बल्कि दुनिया भर के शियाओं के सच्चे मार्गदर्शक और मजलूमों की आवाज थे।
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मंच से संबोधन के दौरान मौलाना मुजिबुल हसन ने भारत सरकार के रुख पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भावुक अपील करते हुए कहा कि भारत को इज़राइल और अमेरिका जैसी ताकतों के साथ अपने सभी व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध समाप्त कर लेने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि मानवता के खिलाफ काम करने वाली शक्तियों के साथ खड़े होना भारतीय संस्कृति के सिद्धांतों के विपरीत है।
पुलिस प्रशासन रहा हाई अलर्ट पर
प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए प्रशासन पहले से ही मुस्तैद था। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की, जिसके बाद समुदाय ने बेहद अनुशासित लेकिन कड़े शब्दों में अपना विरोध दर्ज कराया। शिया समुदाय ने स्पष्ट किया कि आयतुल्लाह खामेनेई का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनके बताए गए न्याय के रास्ते पर समुदाय अडिग रहेगा।
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