स्कूल गई 7 साल की मासूम… लेकिन घर कभी वापस नहीं लौटी — लापरवाही ने छीनी जिंदगी
मेरठ/बागपत: एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार को उम्र भर का गम दे दिया, बल्कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा और प्रशासनिक दावों की भी पोल खोलकर रख रख दी है। सात साल की मासूम अनन्या, जो हर रोज की तरह सुनहरे भविष्य के सपने लेकर स्कूल के लिए घर से निकली थी, अपनी ही स्कूल बस की जर्जर हालत और प्रबंधन की घोर लापरवाही का शिकार हो गई।
जर्जर बस का टूटा फर्श बना काल
मिली जानकारी के अनुसार, हादसा तब हुआ जब अनन्या स्कूल बस में सवार होकर जा रही थी। बताया जा रहा है कि बस का फर्श एक जगह से पूरी तरह टूटा हुआ था। सफर के दौरान अचानक अनन्या का पैर उसी टूटी हुई जगह पर पड़ा और वह चलती बस से नीचे गिर गई। बस की खस्ताहाली और मानकों की अनदेखी ने एक हंसते-खेलते बच्चे के जीवन का सफर बीच में ही समाप्त कर दिया।
ये भी पढ़ें बागपत: देवर ने ईंट से कूचकर भाभी की निर्मम हत्या की, फिर उठाया ये कदम, पुलिस ने किया मुकदमा दर्ज छोटे भाई की चीखें भी नहीं पसीज सकीं
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि बस में अनन्या का छोटा भाई भी मौजूद था। उसने अपनी बहन को अपनी आंखों के सामने गिरते देखा। चश्मदीदों के मुताबिक, मासूम भाई पागलों की तरह चिल्लाता रहा, "अंकल बस रोको, दीदी गिर गई! अंकल रोको!" लेकिन मासूम की चीखें या तो शोर में दब गईं या फिर चालक की संवेदनहीनता के आगे हार गईं। जब तक बस रोकी गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अनन्या दम तोड़ चुकी थी।
सुरक्षा मानकों पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस हादसे ने सीधे तौर पर स्कूल प्रशासन और परिवहन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या इन बसों का समय-समय पर फिटनेस टेस्ट नहीं होता? क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि जर्जर बसों को सड़कों पर उतार दिया जाता है? मासूम अनन्या की मौत की जिम्मेदारी अब कौन लेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
इस घटना के बाद इलाके के अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा एक चेतावनी है उन सभी शिक्षण संस्थानों के लिए जो बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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