इजरायल-ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट, सोमवार को कीमतों में आ सकता है बड़ा उछाल
मुंबई। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते पूरा खाड़ी क्षेत्र तनावग्रस्त हो गया है, इससे इस क्षेत्र से आने वाले कच्चे तेल के प्रवाह पर संकट खड़ा हो गया है। वहीं, गैर-खाड़ी की आपूर्ति खाड़ी देशों के कच्चे तेल की भरपाई नहीं कर पाएगी। यह जानकारी विश्लेषकों ने रविवार को दी गई। ट्रेडर्स ने कहा कि अगर संघर्ष जारी रहता है तो सोमवार को बाजार खुलने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर जहाजों के परिवहन में किसी प्रकार की बाधा की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन टैंकरों के फंसने या टारगेट बनने के जोखिम ने प्रमुख तेल व्यापारियों को जलडमरूमध्य से होकर माल की ढुलाई निलंबित करने के लिए मजबूर किया है। ईरान और ओमान के बीच मौजूद इस जलडमरूमध्य के करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और उससे बने उत्पादन निकलते हैं।
टैंकर माल ढुलाई दरें पहले ही बढ़ चुकी हैं, मध्य पूर्व से चीन तक जाने वाले बहुत बड़े कच्चे तेल वाहकों के लिए दरें 2026 में अब तक तीन गुना हो गई हैं, जो यह दर्शाता है कि जहाज जोखिम लेने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करता है, और आपूर्ति में कमी का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा या नहीं और समुद्री मार्गों पर सामान्य सेवा कितनी जल्दी बहाल होती है। अब तक, ईरान और इजरायल-अमेरिकी संयुक्त बलों के बीच युद्ध में किसी भी प्रमुख तेल और गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर को हमले की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर और कुवैत में विस्फोटों की सूचना मिली है और कई रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के खारग द्वीप के पास धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जो तेहरान के अधिकांश कच्चे तेल निर्यात को संभालने वाला टर्मिनल है।
विश्लेषकों ने 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में हुई पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि अल्पकालिक संघर्षों का भी कीमतों और आपूर्ति पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (आईआरजीसी) ने मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमलों की एक नई लहर की घोषणा की है। ये हमले ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों का बदला लेने के लिए किए जा रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। ईरान सरकार के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "इस जघन्य अपराध का जवाब जरूर दिया जाएगा और यह इस्लामी दुनिया के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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