भारतीय नौसेना ने रचा इतिहास : भारत ने पहली बार मल्टीनेशनल कंबाइंड टास्क फोर्स-154 की कमान संभाली
जानें कैसे यह समुद्री सुरक्षा में भारत का दबदबा बढ़ाएगा
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे भी आगे समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण के लिए पहली बार बहुराष्ट्रीय संयुक्त कार्य बल (सीटीएफ) 154 की कमान संभाल ली है। इसे भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करने वाले एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के रूप में माना जा रहा है। कमांड संभालने पर भारतीय नौसेना का मकसद उच्च प्रभावी प्रशिक्षण पहल प्रदान करना और शांति, समृद्धि एवं सुरक्षा के लिए वैश्विक समुद्री साझीदारी को मजबूत बनाना शामिल है।
ये भी पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री शाह से मिलीं महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवारउन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान कोमोडोर बिएली ने सीटीएफ-154 के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे मुश्किल ऑपरेशन 'ऑपरेशन कंपास रोज़ V' का नेतृत्व किया, जिसमें 22 देशों के लगभग 140 समुद्री सुरक्षा पेशेवर एक साथ आए। उन्होंने पूरे इलाके में 34 देशों के साथ मीटिंग और 19 प्रशिक्षण शिविर भी किए, जिसमें दक्षिणी क्षेत्र के ऑपरेशन्स में देशों को बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए नई रणनीति लागू की गईं। बिएली ने केन्या में ऑपरेशन 'सदर्न रेडीनेस' की भी कमान संभाली, जो सीटीएफ-154 के लिए सबसे बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम था, जिसमें रिकॉर्ड तोड़ 160 लोग शामिल हुए। यह सोमालिया कोस्ट गार्ड की पहली बार हिस्सेदारी पक्की करने के लिए भी खास कार्यक्रम था, जो इलाके की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम था।
ये भी पढ़ें दो दिन की राहत के बाद फिर बिगड़ी हवा, एनसीआर में कई इलाके रेड जोन में, लोनी का एक्यूआई 400 तक पहुंचानौसेना के कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि सीटीएफ 154 विशेष रूप से सीएमएफ के सदस्य देशों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। यह सीएमएफ के 47 देशों के बीच भारत की पेशेवर विशेषज्ञता, परिचालन अनुभव और सुरक्षा भागीदार के रूप में क्षेत्र के बढ़ता विश्वास है। मई, 2023 में स्थापित सीटीएफ-154 मध्य पूर्व और व्यापक क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने के लिए समर्पित है। यह प्रशिक्षण पांच मुख्य स्तंभों समुद्री क्षेत्र जागरुकता (एमडीए), समुद्र का कानून, समुद्री अवरोधन अभियान, समुद्री बचाव और सहायता और नेतृत्व विकास पर केंद्रित है।
ये भी पढ़ें मथुरा के वृंदावन में खौफनाक हादसा: उद्घाटन के दिन ही होटल में लगी आग, 40 लोग फंसे, 3 झुलसेउन्होंने बताया कि यह कार्यबल नियमित रूप से समुद्री सुरक्षा संवर्धन प्रशिक्षण (एमएसईटी) कार्यक्रम और उत्तरी-दक्षिणी तत्परता जैसे अभ्यास आयोजित करता है। तस्करी, समुद्री डकैती और अनियमित प्रवासन जैसे सामान्य खतरों के खिलाफ सहयोगी देशों की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए संपर्क कार्यक्रम भी यही कार्यबल चलाता है। सीटीएफ-154 सीएमएफ के अन्य टास्क फोर्स के साथ मिलकर सीटीएफ 150 (समुद्री सुरक्षा), सीटीएफ 151 (समुद्री डकैती विरोधी अभियान), सीटीएफ 152 (अरब की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा) और सीटीएफ 153 (लाल सागर में समुद्री सुरक्षा) कार्यों को अंजाम देता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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