बांग्लादेश समझौते का भारत और अमेरिका के बीच व्यापार अधिशेष पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह 90 अरब डॉलर पार कर सकता है: एसबीआई
नई दिल्ली। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद भारत का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) सालाना 90 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।
इससे भारत और उसके निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा, जबकि देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों में कोई बड़ा समझौता नहीं कर रहा है। एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि शुरुआती अनुमान के अनुसार भारतीय निर्यातक एक वर्ष में शीर्ष 15 उत्पादों का निर्यात अमेरिका को 97 अरब डॉलर तक बढ़ा सकते हैं। अन्य उत्पादों को मिलाकर यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है। वहीं अमेरिका से भारत में हर साल 50 अरब डॉलर से अधिक का आयात होने की संभावना है (सेवाओं को छोड़कर)। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष 40.9 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-दिसंबर) में यह 26 अरब डॉलर रहा और आने वाले समय में यह सालाना 90 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।
अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते पर भी रिपोर्ट में चर्चा की गई है। अमेरिका भारत से लगभग 7.5 अरब डॉलर का कपड़ा आयात करता है और लगभग इतनी ही मात्रा में बांग्लादेश से भी आयात करता है। हालांकि दोनों देशों से आयात किए जाने वाले उत्पाद अलग-अलग प्रकार के होते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका बांग्लादेश से अधिक मात्रा में परिधान (बुने हुए नहीं) आयात करता है, जबकि अन्य तैयार वस्त्रों का आयात भारत से अधिक मात्रा में होता है। हाल ही में अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते में बांग्लादेशी सामान पर टैरिफ घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही एक शर्त भी रखी गई है कि अगर बांग्लादेश अमेरिका से कपास और मानव निर्मित फाइबर आयात करेगा, तो कुछ मात्रा में उसके कपड़ा उत्पादों पर शून्य टैरिफ लागू होगा। इससे यह आशंका जताई गई कि भारतीय कपड़ा निर्यातकों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका से कच्चा माल आयात करना भारत की तुलना में महंगा पड़ेगा, इसलिए भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर नहीं होगी। अगर अमेरिका की कपास बांग्लादेश को निर्यात की जाने वाली भारत की 10 प्रतिशत कपास और 2 प्रतिशत मानव निर्मित फाइबर की जगह ले भी ले, तो भारत को केवल लगभग 1 अरब डॉलर का छोटा नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यूरोप के साथ हुए हालिया समझौते से भारत के लिए 260 अरब डॉलर के कपड़ा बाजार में बिना शुल्क (जीरो ड्यूटी) प्रवेश का रास्ता खुल गया है। इससे भारतीय कपड़ा उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है।
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लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
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