एस. जयशंकर का अमेरिका को करारा जवाब: 'रूस से तेल खरीदना हमारी जरूरत, हम रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेंगे'
म्यूनिख। अमेरिका बार-बार इस बात के दावे कर रहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। इस बीच भारत ने अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी सुनिश्चित करते हुए, वैश्विक स्तर पर यह साफ संदेश दिया है कि उसके ऊर्जा से जुड़े फैसले उपलब्धता, कीमत और जोखिम को ध्यान में रखकर तय किए जाएंगे। बता दें, भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है। तब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो दावा कर रहे हैं कि भारत रूसी क्रूड के एक्स्ट्रा इम्पोर्ट को रोकने पर सहमत हो गया है।
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खास तौर पर ऊर्जा प्रावधान का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने ग्लोबल तेल मार्केट को कॉम्प्लेक्स बताया और कहा, "जहां तक एनर्जी के मामलों की बात है, यह आज एक कॉम्प्लेक्स मार्केट है। भारत में तेल कंपनियां, यूरोप की तरह और शायद दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी, उपलब्धता, कीमत और रिस्क को देखती हैं और ऐसे फैसले लेती हैं जो उन्हें लगता है कि उनके सबसे अच्छे फायदे में हैं।" जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत व्यापार समझौते की शर्तों के तहत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा, तो जयशंकर ने साफ जवाब दिया, "अगर आपके सवाल का सीधा मतलब यह है कि क्या मैं आजाद सोच वाला रहूंगा और अपने फैसले लूंगा और क्या मैं ऐसे फैसले लूंगा जो आपकी सोच से मेल न खाएं, तो हां, ऐसा हो सकता है।" भारत ने अब तक वॉशिंगटन के इस दावे की न तो आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है और न ही इनकार किया है कि उसने रूसी क्रूड ऑयल का और इम्पोर्ट रोकने का वादा किया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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