जेपी इंफ्राटेक के पूर्व सीएमडी मनोज गौर समेत तीन को राऊज एवेन्यू कोर्ट से मिली नियमित जमानत
13,000 करोड़ से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अभी भी जेल में बंद रहेंगे
नई दिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के पूर्व सीएमडी मनोज गौर को नियमित जमानत दी है। मनोज गौर पर फ्लैट खरीदने वालों से लिए गए कई हजार करोड़ रुपए के हेराफेरी का आरोप है। हालांकि, वे मनी लॉन्ड्रिंग केस में अभी भी जेल में बंद रहेंगे। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने समय पर खरीददारों को घर मुहैया न कराने के आरोप में दाखिल सीबीआई की चार्जशीट के बाद मनोज गौर को नियमित जमानत दी। उनके साथ समीर गौर और सुनील शर्मा को भी नियमित जमानत दी गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले साल नवंबर में मनोज गौर को घर खरीदारों के पैसे के दुरुपयोग और नोएडा के आसपास की परियोजनाओं में देरी से जुड़े धन शोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया। ईडी की जांच में मिला कि जेएएल और जेआईएल की ओर से घर खरीदारों से एकत्र किए गए लगभग 14,599 करोड़ रुपए में से बड़ी राशि गैर-निर्माण उद्देश्यों के लिए डायवर्ट की गई थी। जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के घर खरीदारों की ओर से कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। शिकायतों में कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया गया था। इन पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मुकदमा दर्ज किया था।
इसी केस के आधार पर ईडी ने मामले की जांच शुरू की। ईडी ने एक बयान में कहा कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और पूरा होने के लिए हजारों घर खरीदारों से एकत्रित धन को निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया, जिससे घर खरीदारों को धोखा मिला और उनकी परियोजनाएं अधूरी रह गईं। यह धन जेपी सेवा संस्थान (जेएसएस), जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड (जेएचएल) और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (जेएसआईएल) सहित संबंधित समूह संस्थाओं और ट्रस्टों में स्थानांतरित कर दिया गया। इस साल 7 जनवरी को ईडी ने मनोज गौर की लगभग 400 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति को अटैच किया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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