उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया तमिल विरासत और सभ्यतागत गौरव पर आधारित 16 पुस्तकों का विमोचन
आर्थिक प्रगति के साथ सांस्कृतिक संरक्षण भी अनिवार्य, युवाओं से प्रतिदिन एक घंटा पुस्तक पढ़ने का किया आह्वान
नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। ये पुस्तकें प्रख्यात तमिल विद्वानों, मंदिर वास्तुकला, साहित्य और भारत की गहरी सभ्यतागत जड़ों पर आधारित हैं।
उपराष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित एक भव्य समारोह में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बंकिम चंद्र चटर्जी पर तमिल, अंग्रेजी और हिंदी में प्रकाशित एक विशेष पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने 'वंदे मातरम' के रचयिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस गीत के दो शब्दों में हमारी मिट्टी की सुगंध और मातृभूमि की अटूट भावना समाहित है, जिसने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के भीतर क्रांति की ज्वाला जलाई थी।
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यहां विमोचित की गई पुस्तकों में रामेश्वरम के पवित्र केंद्र, श्री रामानुजा के जीवन दर्शन, प्राचीन व्यापार केंद्र अरिकामेडु और नयनार व अलवारों के भक्ति साहित्य को प्रमुखता दी गई है। वहीं पारंपरिक ज्ञान और भविष्य की तकनीक का संगम के रुप में आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि पर आधारित उभरती वैज्ञानिक तकनीकें नामक पुस्तक भी सामने आई। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि ये प्रकाशन केवल कागज़ के पन्ने नहीं, बल्कि तमिल सभ्यता की गहराई और विविधता का जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने विशेष रूप से मीनाक्षी अम्मन और बृहदीश्वर मंदिर की स्थापत्य कला पर आधारित पुस्तकों का उल्लेख करते हुए भारतीय मंदिरों को कला, विज्ञान और सामाजिक संगठन का केंद्र बताया।
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उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन को साझा करते हुए कहा कि आर्थिक विकास तब तक अधूरा है जब तक हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित न करें। उन्होंने 'काशी तमिल संगमम' जैसी पहलों और वैश्विक मंचों पर तिरुक्कुरल के बढ़ते सम्मान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत भले ही अनेक भाषाओं की भूमि हो, लेकिन इसकी आत्मा एक है, जो 'वसुधैव कुटुंबकम' के आदर्शों से जुड़ी है।
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राधाकृष्णन ने इस बदलते तकनीकी युग का जिक्र करते हुए युवाओं को आगाह किया कि उन्हें ऊँची उड़ान के लिए पंखों के साथ-साथ अपनी संस्कृति की मजबूत नींव की भी जरूरत है। उन्होंने देश की युवा पीढ़ी से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा गंभीर अध्ययन और पुस्तक पठन के लिए समर्पित करने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, उपराष्ट्रपति के सचिव अमित खरे, प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक भूपेंद्र कैंथोला, प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों और अन्य गणमान्य लोगों ने भागीदारी की।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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