टैक्स बकायेदारों पर निगम का शिकंजा: बाजारों में पहुंची टीम, 17 जगह सील,12.89 लाख की ऑन-द-स्पॉट वसूली
बरेली। शहर के बाजारों में गुरुवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब नगर निगम बरेली की टीम बकाया संपत्ति कर वसूली के लिए दस्तक देती नजर आई। साहूकारा से लेकर परसाखेड़ा, सिकलापुर और कटरा चांद खां तक एक-एक कर शटर गिरते गए और निगम की सील चिपकती चली गई। जिन व्यापारियों ने तय समय सीमा के भीतर बकाया जमा नहीं किया, उनके प्रतिष्ठानों पर सीधे ताला जड़ दिया गया।
पहले नोटिस, फिर सख्ती और सीधे सील
निगम सूत्रों के मुताबिक कई बार नोटिस भेजे गए, चेतावनी दी गई, लेकिन जब रकम जमा नहीं हुई तो कार्रवाई तय थी। जोन-01 में आठ, जोन-02 में चार और जोन-03 में पांच व्यावसायिक संपत्तियों को सील कर दिया गया। टीम जब मौके पर पहुंची तो कुछ जगहों पर हड़बड़ी में रकम जुटाने की कोशिश भी हुई, लेकिन जहां भुगतान नहीं हुआ, वहां सीलिंग में कोई नरमी नहीं दिखाई गई।
दिलचस्प यह रहा कि सख्ती का असर तुरंत दिखा। सीलिंग अभियान के दौरान ही कई बकायेदारों ने बकाया जमा कराया और कुल 12,89,662 रुपये की राशि नगर निगम कोष में जमा हुई। निगम अधिकारियों का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, जिन्होंने अब भी कर नहीं चुकाया है, उनकी सूची अलग से तैयार है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पी.के. द्विवेदी ने साफ कहा कि बकाया संपत्ति कर की वसूली के लिए अभियान अब रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा नोटिस के बाद भी भुगतान न करने वालों पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी। निगम ने सभी भवन और संपत्ति स्वामियों को स्पष्ट संदेश दिया है, या तो बकाया जमा करें, या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। शहर में अब कर वसूली को लेकर ढिलाई नहीं, सीधे सख्ती का दौर शुरू हो चुका है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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