रेल सुरक्षा में बड़ी छलांग: प्रयागराज-कानपुर रेल मार्ग पर 'सुरक्षा कवच' तैनात
अब 160 की रफ्तार पर भी नहीं टकराएंगी ट्रेनें, सुरक्षित हुई 160 किमी की रफ्तार

कानपुर। भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा प्रणाली को अत्याधुनिक बनाते हुए रविवार को उत्तर मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त प्रयागराज-कानपुर सेक्शन (190 रूट किमी) पर स्वदेशी 'कवच' (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। इस प्रणाली के शुरू होने से अब मानवीय चूक के कारण होने वाले रेल हादसों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।
उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एन.पी. सिंह ने बताया कि रविवार को इस ऐतिहासिक शुरुआत को औपचारिक रूप देने के लिए गाड़ी संख्या 14163 के लोकोमोटिव में 'कवच' प्रणाली सक्रिय की गई। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने स्वयं सूबेदारगंज से मनौरी स्टेशन तक ट्रेन के इंजन (लोकोमोटिव) में सवार होकर 'फुटप्लेट निरीक्षण' किया। उन्होंने परिचालन के दौरान सिस्टम की सटीकता और ब्रेक लगने की प्रक्रिया का बारीकी से आकलन किया।
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पहले चरण में इस मार्ग पर चलने वाली 8 जोड़ी ट्रेनों को कवच से लैस किया गया है, जिनमें चौरी-चौरा एक्सप्रेस (15003/15004),प्रयागराज एक्सप्रेस (12417/12418) और हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस (12307/12308) ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा वंदे भारत ट्रेनों को भी चरणबद्ध तरीके से इसमें शामिल किया जा रहा है।
20 हजार किमी का कड़ा ट्रायल
इस प्रणाली को सार्वजनिक करने से पहले व्यापक परीक्षण किए गए। WAP-7 लोकोमोटिव और 20 कोच वाली वंदे भारत रेक के साथ विभिन्न स्थितियों में ट्रायल हुआ। यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'चौरी चौरा एक्सप्रेस' के साथ 20,000 किलोमीटर से अधिक का ट्रायल रन पूरा किया गया, जिसके परिणाम पूरी तरह संतोषजनक रहे।
क्या है सुरक्षा कवच?
यह 'मेक इन इंडिया' के तहत विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यदि लोको पायलट सिग्नल जंप करता है या मानवीय भूल होती है, तो कवच अपने-आप ब्रेक लगा देता है। यह आमने-सामने की टक्कर रोकने और धुंध (Fog) के दौरान सुरक्षित परिचालन में सहायक है।
अगला लक्ष्य: गाज़ियाबाद-टुंडला सेक्शन
प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री सतेंद्र कुमार के नेतृत्व में मिली इस सफलता के बाद, रेलवे अब 'मिशन रफ़्तार' के तहत गाज़ियाबाद-टुंडला सेक्शन पर कवच लगाने की तैयारी कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को 160 किमी/घंटा की निर्बाध और सुरक्षित गति प्रदान करना है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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