यूपी के स्थायी डीजीपी की नियुक्ति में फंसा तकनीकी पेंच: यूपीएससी ने प्रस्ताव लौटाया, राजीव कृष्ण रेस में सबसे आगे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का मामला एक बार फिर लटक गया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को तकनीकी खामियों और पुराने प्रारूप का हवाला देकर मुख्य सचिव को वापस लौटा दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रस्ताव वर्ष 2025 की नई गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार कर दोबारा भेजा जाए। इसके लिए राज्य सरकार को तीन महीने का समय दिया गया है।
राजीव कृष्ण का नाम सबसे ऊपर, लेकिन तकनीकी बाधा बरकरार वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को स्थायी डीजीपी बनाए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। वह मई 2025 से प्रशांत कुमार के स्थान पर कार्यवाहक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और प्रदेश के लगातार पांचवें कार्यवाहक डीजीपी हैं। हालांकि, यूपीएससी ने प्रस्ताव के प्रारूप पर आपत्ति जताई है। सूत्रों के अनुसार, नई गाइडलाइन में पैनल भेजने में हुई देरी का कारण बताना अनिवार्य है, जो पूर्व के प्रस्ताव में शामिल नहीं था। गृह विभाग अब एक सप्ताह के भीतर नए सिरे से संशोधित प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है।
वरिष्ठता सूची में बड़ा उलटफेर: रेणुका मिश्रा और आलोक शर्मा रेस से बाहर डीजीपी की चयन प्रक्रिया में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम विभिन्न कारणों से कट गए हैं:
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रेणुका मिश्रा: यूपी कैडर की सबसे सीनियर अफसर होने के बावजूद उन्हें इस रेस से बाहर कर दिया गया है। सरकार ने 2024 के पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में उनकी लापरवाही को आधार बनाया है। प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि भर्ती बोर्ड की चेयरमैन रहते हुए परीक्षा की सुचिता बनाए रखने में विफल रहने के कारण वह इस पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
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आलोक शर्मा: केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात डीजी एसपीजी आलोक शर्मा का नाम सेवा अवधि के नियम के कारण बाहर हुआ है। यूपीएससी के नियमों के अनुसार, स्थायी डीजीपी के लिए कम से कम 6 महीने की सेवा शेष होनी चाहिए, जबकि शर्मा की सेवा अवधि इससे कम बची है।
अब इन तीन नामों पर टिकी नजरें वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर होने के बाद अब यूपीएससी के सामने मुख्य रूप से तीन नाम विचारणीय होंगे:
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पीयूष आनंद (1991 बैच)
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राजीव कृष्ण (1991 बैच)
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पीसी मीणा (1991 बैच)
राजीव कृष्ण की दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि उनका कार्यकाल जून 2029 तक है और उनकी छवि एक 'टेक्नोक्रेट' पुलिस अधिकारी की है। उन्होंने 'ऑपरेशन पहचान' ऐप और ई-मालखाना जैसे डिजिटल नवाचारों के जरिए यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार किया है।
चार साल से स्थायी मुखिया का इंतजार उत्तर प्रदेश में मई 2022 में मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद से कोई भी स्थायी डीजीपी नियुक्त नहीं हो सका है। पिछले चार वर्षों में देवेंद्र सिंह चौहान, राजकुमार विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और अब राजीव कृष्ण कार्यवाहक के तौर पर विभाग संभाल रहे हैं। यदि इस बार यूपीएससी पैनल को मंजूरी दे देता है, तो लंबे समय बाद प्रदेश पुलिस को अपना पूर्णकालिक मुखिया मिल सकेगा।
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