बदायूं कोर्ट से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव को बड़ी राहत; आचार संहिता उल्लंघन के मामले में हुए बरी

बदायूं। आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को बदायूं की एक अदालत ने बड़ी राहत दी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज किए गए आचार संहिता उल्लंघन और वोटरों को प्रलोभन देने के मामले में कोर्ट ने उन्हें निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद फरवरी 2022 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। उस समय बदायूं के तत्कालीन एसडीएम सदर सुखलाल प्रसाद वर्मा ने सिविल लाइंस थाने में धर्मेंद्र यादव और 28 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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आरोप: आरोप था कि धर्मेंद्र यादव ने शहर के एक लॉन में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की बैठक बुलाकर उन्हें लालच देकर वोट खरीदने की कोशिश की।
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धाराएं: उन पर कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं के तहत भी केस दर्ज किया गया था।
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पूर्व का घटनाक्रम: जून 2024 में इस मामले के अन्य 28 आरोपियों (जिनमें रईस अहमद, फखरे अहमद शोबी और रंजीत यादव शामिल थे) को पहले ही बरी किया जा चुका था, लेकिन धर्मेंद्र यादव के खिलाफ सुनवाई जारी थी।
न्यायालय का फैसला
धर्मेंद्र यादव के अधिवक्ता और पूर्व एडीजीसी जगत सिंह यादव ने बताया कि मामले की बहस बुधवार को ही पूरी हो गई थी। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि धर्मेंद्र यादव ने किसी को प्रलोभन दिया या चुनावी शुचिता का उल्लंघन किया। इसके बाद आज अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
बरी होने के बाद बोले धर्मेंद्र: "HPCL अफसरों की हत्या की हो CBI जांच"
कोर्ट से बाहर निकलने के बाद सांसद धर्मेंद्र यादव ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्थानीय कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने हाल ही में हुए HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के अधिकारियों की हत्या के मामले में जिला प्रशासन और सत्तापक्ष को घेरा।
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प्रशासन पर विफलता का आरोप: धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यदि डीएम और एसएसपी ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो अधिकारियों की जान बच सकती थी। उन्होंने दावा किया कि मृतक अधिकारियों ने पहले ही अपनी हत्या की आशंका जताते हुए प्रशासन को लिखित सूचना दी थी।
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सत्तापक्ष को घेरा: उन्होंने स्थानीय भाजपा विधायक और उनके समर्थकों पर 'सुनियोजित हत्या' का आरोप लगाते हुए कहा कि जब जिले में बड़े अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
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मांग: सपा सांसद ने इस पूरे हत्याकांड की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग की है।
इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है, वहीं धर्मेंद्र यादव के बयानों ने जिले की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।
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