सहारनपुर के मेजर ने पेश की अनूठी मिसाल: शादी में ठुकराया दहेज, शगुन में लिया मात्र 1 रुपया और नारियल
दहेज मुक्त भारत का संकल्प: कैप्टन और मेजर की जोड़ी ने समाज को दिया सादगी और सेवा का संदेश

सहारनपुर। आज के दौर में जहां शादियां अपनी चमक-धमक और भारी-भरकम दहेज के लिए जानी जाती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र के एक जांबाज सैन्य अधिकारी ने समाज की इस कुरीति पर कड़ा प्रहार किया है। भारतीय सेना में तैनात मेजर मधुर चौधरी ने अपनी शादी में मिलने वाले सभी कीमती उपहार और शगुन की राशि को ससम्मान लौटाकर केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार किया। उनकी इस पहल की पूरे जनपद और सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।
मूल रूप से मीरपुर गांव के रहने वाले मेजर मधुर चौधरी के खून में ही देश सेवा रची-बसी है। उनके पिता चौधरी ओमपाल सिंह भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। परिजनों के मुताबिक, मधुर बचपन से ही दहेज प्रथा के कट्टर विरोधी थे। वर्ष 2018 में संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा पास कर सेना में अधिकारी बनने के बाद भी उनका संकल्प अडिग रहा। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अपनी जीवनसंगिनी के रूप में दहेज नहीं, बल्कि गुणों को प्राथमिकता देंगे। मेजर मधुर के पिता चौधरी ओमपाल सिंह मधुर ने बीटेक के बाद सेना में जाने का निर्णय लिया था और वह हमेशा से सामाजिक बुराइयों के खिलाफ रहे हैं। हमें गर्व है कि उन्होंने अपने निजी जीवन में भी उन्हीं आदर्शों को उतारा है जिनकी शपथ एक सैनिक लेता है
सैन्य दंपती: देश सेवा के साथ सामाजिक सुधार
मेजर मधुर चौधरी की पत्नी ज्योति भी भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर तैनात हैं। दोनों ही उच्च शिक्षित हैं और वर्तमान में देश की सीमाओं की रक्षा के प्रति समर्पित हैं। इस विवाह ने न केवल दो सैन्य परिवारों को जोड़ा है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि शिक्षा और पद का असली अर्थ समाज की रूढ़ियों को तोड़ना है।
विनम्रता के साथ लौटाए उपहार
विवाह समारोह के दौरान जब वधू पक्ष की ओर से शगुन और महंगे उपहार भेंट किए गए, तो मेजर मधुर ने बड़ी ही विनम्रता के साथ उन्हें यह कहते हुए वापस कर दिया कि उनके लिए उनकी पत्नी ही सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने रस्म अदायगी के लिए केवल एक रुपया और नारियल लेकर विवाह संपन्न किया।
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लेखक के बारे में
गौरव सिंघल सहारनपुर के एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जो पिछले 18 वर्षों (2007 से) से मीडिया जगत में सक्रिय हैं। पत्रकारिता की बारीकियां उन्होंने विरासत में अपने पिता के मार्गदर्शन में 'अमर उजाला' और 'हिन्दुस्तान' जैसे संस्थानों से सीखीं।
अपने लंबे करियर में उन्होंने इंडिया टुडे (फोटो जर्नलिस्ट), शुक्रवार, इतवार, दैनिक संवाद और यूपी बुलेटिन जैसे दर्जनों प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दीं। लेखनी के साथ-साथ कुशल फोटो जर्नलिस्ट के रूप में भी उनकी विशिष्ट पहचान है।
विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में अनुभव प्राप्त करने के बाद, वर्तमान में गौरव सिंघल सहारनपुर से 'रॉयल बुलेटिन' के साथ जुड़कर अपनी निष्पक्ष और गहरी रिपोर्टिंग से संस्थान को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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