रायबरेली में 50 साल पुरानी सुपर मार्केट को बचाने उतरे व्यापारी, किया धरना- प्रदर्शन
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर में पचास साल पुराने सुपर मार्केट को बचाने के लिए व्यापारी सड़क पर उतर गए हैं। बुधवार को पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ व्यापारी संगठनों ने धरना -प्रदर्शन किया है। पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपाेर्ट में इस मार्केट काे जर्जर बताया है।
उल्लेखनीय है कि रायबरेली नगर पालिका परिषद ने वर्ष 1976 में सुपर मार्केट और बहादुर मार्केट का निर्माण कराया था। वर्तमान में यहाँ एक सौ से अधिक व्यापारियों की दुकानें संचालित हैं। सिर्फ छोटे दुकानदार ही नहीं, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक(एसबीआई) जैसे बड़े बैंक भी इस परिसर में हैं।
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना है कि नगर पालिका बिल्डिंग की हालत इतनी जर्जर नहीं है कि उसे गिराया जाए। मामूली मरम्मत और मेंटेनेंस के जरिए बिल्डिंग को दोबारा मजबूत किया जा सकता है। व्यापारियों का आरोप है कि किसी खास मंशा या साजिश के तहत उन्हें उजाड़ने की कोशिश की जा रही है। व्यापारी नेता बसंत सिंह बग्गा ने कहा कि यह कार्यवाही को व्यापारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा व्यापारियों के साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। यह लड़ाई सड़क से लेकर शासन तक लड़ी जाएगी। अगर नगर पालिका ने अपनी तानाशाही बंद नहीं की, तो पूरा रायबरेली बंद कराया जाएगा।
उधर नोटिस जारी होने के बाद से व्यापारियों में अनिश्चितता और डर का माहौल है। व्यापारियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए और दुकानों को उजाड़ने के बजाय उनके नवीनीकरण पर विचार किया जाए। हालांकि इस बारे में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी टिप्पणी करने के लिए राजी नहीं हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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