अखिलेश यादव का बड़ा बयान, 2017 के बाद मुकदमे वापस लेने पर उठाए सवाल
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने वर्ष 2017 के बाद सत्ता पक्ष के नेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे 'संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कानून का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के मुकदमों पर घेरा
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही सबसे पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत अपने कई वरिष्ठ नेताओं पर दर्ज आपराधिक मुकदमों को वापस लेने का काम किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये मुकदमे दंगों और गंभीर धाराओं से संबंधित नहीं थे? अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार 'जीरो टॉलरेंस' का दावा करती है, उसने अपने दागी नेताओं को क्लीन चिट देने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया है।
विपक्ष पर कार्रवाई और अपनों पर मेहरबानी
सपा प्रमुख ने दोहराया कि 2017 के बाद से प्रदेश में न्याय का दोहरा मापदंड चल रहा है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं और उनके खिलाफ बुलडोजर जैसी कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के नेताओं के गंभीर मामलों को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि पिछले सात वर्षों में किन-किन नेताओं पर से मुकदमे हटाए गए और उनके पीछे का कानूनी आधार क्या था।
लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए खतरा
अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि मुकदमों को वापस लेने की यह परंपरा लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों की प्रतीक्षा किए बिना सरकार खुद ही जज बनकर अपने लोगों को दोषमुक्त कर रही है। सपा अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में प्रदेश की जनता इस भेदभावपूर्ण शासन का अंत करेगी और प्रदेश में फिर से कानून का इकबाल कायम होगा।
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