लखनऊ में यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भारी हंगामा, पुलिस से तीखी धक्का-मुक्की, अलंकार अग्निहोत्री बोले- BJP से छिटका सवर्ण समाज
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर शनिवार को यूजीसी की नीतियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जबरदस्त झड़प और धक्का-मुक्की देखने को मिली। आंदोलनकारी इतने उग्र थे कि वे पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा घेरे और बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। विरोध के चरम पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक रूप से अपने कपड़े उतारकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे इलाके में घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
बैरिकेडिंग लांघने की कोशिश में हुई भिड़ंत
प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार और यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी, लेकिन छात्र और युवा प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की में कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं, वहीं पुलिस को भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलाव छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।
सवर्ण समाज भाजपा से छिटका: अलंकार अग्निहोत्री
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ नेता अलंकार अग्निहोत्री ने इस दौरान भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों से अब सवर्ण समाज का मोहभंग हो चुका है। अग्निहोत्री ने दावा किया कि भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाने वाला सवर्ण समाज अब उससे पूरी तरह छिटक चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युवाओं और छात्रों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप लेगा।
राजधानी के मुख्य मार्गों पर लगा लंबा जाम
इस विरोध प्रदर्शन के कारण हजरतगंज और उसके आसपास के प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। घंटों तक लगे लंबे जाम के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर धरना स्थल से हटाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
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