लखनऊ मेट्रो की रेल पटरियों पर गंभीर सवाल, CAG रिपोर्ट में मानकों के उल्लंघन और लापरवाही का खुलासा
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक खुलासा सामने आया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में लखनऊ मेट्रो की रेल पटरियों की गुणवत्ता, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मेट्रो की कुछ रेल पटरियां निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर संभावित खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ये भी पढ़ें बहन को ससुराल से घर लाते समय रास्ते में मार डाला, पुलिस को अपहरण की कहानी बताने वाला भाई गिरफ्ताररिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो ट्रैक की मजबूती और गुणवत्ता को लेकर आवश्यक परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई गई हैं। विशेष रूप से स्पीड लिमिट प्रमाण पत्र (Speed Limit Certificate) का समय पर नवीनीकरण नहीं कराया गया, जो मेट्रो संचालन के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा दस्तावेज होता है। इस लापरवाही के चलते निर्धारित सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ और मेट्रो संचालन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
CAG की जांच में यह भी सामने आया है कि मेट्रो ट्रैक बिछाने के दौरान कई तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। इस कार्य के लिए कालिंदी नामक एक फर्म को ठेका दिया गया था, जिसके बारे में रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह फर्म कागजों पर ही अधिक सक्रिय थी और उसके कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। ट्रैक निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण प्रक्रिया में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि मेट्रो परियोजना से जुड़े प्रमुख निर्माण भागीदारों टाटा ग्रुप और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने पहले ही मेट्रो प्रशासन को ट्रैक की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को लेकर चेतावनी दी थी। इसके बावजूद आवश्यक सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए, जिससे यह स्थिति और गंभीर हो गई।
रिपोर्ट में तत्कालीन प्रबंध निदेशक कुमार केशव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में अनियमितता और निगरानी की कमी रही। वहीं वर्तमान प्रबंध निदेशक सुशील कुमार की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर और भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो जैसे उच्च सुरक्षा मानकों वाले परिवहन तंत्र में इस प्रकार की लापरवाही बेहद गंभीर है। यदि समय रहते आवश्यक निरीक्षण, प्रमाणन और मरम्मत कार्य नहीं किए गए, तो यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है।
हालांकि, मेट्रो प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन CAG रिपोर्ट के सामने आने के बाद मेट्रो परियोजना की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक जांच और सुधारात्मक कार्रवाई करेगा, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और मेट्रो संचालन में विश्वास बना रहे।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

टिप्पणियां