यूपी विधानसभा: मंत्री ने स्पीकर सतीश महाना को जता दिया उनके इलाके में विकास पर अहसान, भड़के स्पीकर; कहा- काम कराने के लिए ही हो
मंत्री ने गिनाए स्पीकर के क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य, तो अध्यक्ष ने जिम्मेदारी और जवाबदेही का दिलाया अहसास; सदन में चर्चा का विषय बनी तीखी प्रतिक्रिया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में उस समय एक दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई, जब सरकार के एक मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के बीच सीधे संवाद ने सदन का माहौल बदल दिया। चर्चा के दौरान मंत्री द्वारा किए गए एक दावे पर स्पीकर ने न केवल कड़ी प्रतिक्रिया दी, बल्कि संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी और जनहित के कार्यों की जवाबदेही को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। दोनों के बीच हुई यह हल्की तीखी बातचीत अब राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
सदन की कार्यवाही के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह अपनी बात रख रहे थे। इसी बीच उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों का उल्लेख किया। मंत्री ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष के क्षेत्र की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्वयं फोन कर पहल की और उन विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा भी कराया। मंत्री की इस टिप्पणी का आशय संभवतः सरकार की सक्रियता को दर्शाना था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष को यह 'एहसान जताने' वाली शैली पसंद नहीं आई।
मंत्री की इस बात पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने तुरंत हस्तक्षेप किया और बेहद सख्त व स्पष्ट शब्दों में पलटवार किया। स्पीकर ने कहा— “अगर काम नहीं करवाना है तो पद पर रहने का क्या औचित्य है? काम करवाना सरकार और मंत्रियों की जिम्मेदारी है, इसे सदन में गिनाने की जरूरत नहीं है।” अध्यक्ष की इस दो-टूक टिप्पणी के बाद सदन में कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा पसर गया। महाना ने स्पष्ट किया कि विकास कार्य करना किसी पर उपकार नहीं, बल्कि उस संवैधानिक पद का कर्तव्य है जिस पर कोई व्यक्ति आसीन है।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: पुलिस बेड़े में शामिल हुईं 10 नई पीआरवी गाड़ियां, एसएसपी ने हरी झंडी दिखाकर किया रवानास्पीकर की इस टिप्पणी को सदन के कई सदस्यों ने मंत्रियों के लिए एक सीधा संदेश माना कि जनप्रतिनिधियों और जनता के कार्यों को करना उनका प्राथमिक दायित्व है। इससे पहले भी सतीश महाना सदन की गरिमा और विधायकों के अधिकारों को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। आज का यह वाकया चर्चा का विषय इसलिए भी है क्योंकि एक ही दल से जुड़े होने के बावजूद अध्यक्ष ने संवैधानिक मर्यादा को सर्वोपरि रखते हुए मंत्री को उनकी जिम्मेदारी का बोध कराया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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