यूपी विधानसभा: सदन में गूंजा मुफ्त बिजली और शिक्षा मित्रों के मानदेय का मुद्दा; सपा विधायक अतुल प्रधान और मंत्री के बीच हुई तीखी नोकझोंक, शिवपाल बोले- 'झूठ बोलते हैं बिजली मंत्री'
अफसरों द्वारा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर स्पीकर सख्त, बोले- 'विधायकों का फोन उठाना और सम्मान देना अनिवार्य'
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन बुधवार को काफी गहमागहमी भरा रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जनप्रतिनिधियों की गरिमा और अफसरों की मनमानी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। विधायकों की शिकायत थी कि जिले के प्रशासनिक अधिकारी और पुलिसकर्मी उनका फोन तक रिसीव नहीं करते, जिससे जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस गंभीर विषय पर हस्तक्षेप करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि अधिकारी न केवल विधायकों का फोन उठाएं, बल्कि उन्हें उचित सम्मान भी दें। सदन में आज किसानों की बिजली, शिक्षा मित्रों का भविष्य और सड़कों की हालत जैसे मुद्दों पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों पर विधायकों का सहयोग करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वहीं, सदन में चर्चा के दौरान सपा विधायक अतुल प्रधान ने किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली न मिलने का मामला उठाया।दोनों के बीच कुछ तनातनी भी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में पांच लाख किसानों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। इस पर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि जिन किसानों ने पंजीकरण नहीं कराया है, केवल उन्हें ही लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस दौरान विधायक द्वारा मंत्री को 'झूठा' कहे जाने पर स्पीकर ने आपत्ति जताई और शब्द को कार्यवाही से निकालने का निर्देश दिया।
सदन में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सपा विधायक ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि 10 साल से शिक्षा मित्र लाचार हैं और कम मानदेय के कारण कई लोग आत्महत्या कर चुके हैं। जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10 हजार किया है और उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा से भी जोड़ा गया है। इसी बीच, चाचा शिवपाल यादव ने मंत्री एके शर्मा पर तंज कसते हुए कहा कि मंत्री जी ऐसे बात कर रहे हैं जैसे 2017 से पहले कोई काम ही नहीं हुआ। इस पर अध्यक्ष ने मजाकिया लहजे में कहा कि आप लोग थोड़ा 'एडजस्ट' कर लीजिए, जिससे पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।
विधानसभा में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के बीच पुराने आंदोलनों को लेकर भी चर्चा हुई। सुरेश खन्ना ने अपने 37 वर्षों के संसदीय जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे विपक्षी दौर में उन पर फर्जी मुकदमे लादे गए थे। वहीं, कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' ने मनरेगा के मुद्दे पर कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज और खुद को हाउस अरेस्ट किए जाने का विरोध दर्ज कराया। पूरे दिन चली चर्चा में सड़कों के नवीनीकरण से लेकर दिव्यांगों को फ्री बिजली देने जैसे सवालों पर सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं, जबकि विपक्ष ने सरकार को जमीन हकीकत पर घेरने का प्रयास किया।
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