मंत्री नरेंद्र कश्यप का बयान — सभी धार्मिक स्थलों पर नियम एक समान लागू
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में रमजान के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का मुद्दा गरमा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों द्वारा इफ्तार और सहरी के समय लाउडस्पीकर की अनुमति मांगने पर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों पर नियम एक समान लागू होते हैं और किसी भी समुदाय को अलग से रियायत नहीं दी जा सकती।
सपा विधायक कमाल अख्तर ने उठाया मुद्दा
विधानसभा में शून्यकाल के दौरान सपा विधायक और मुख्य सचेतक कमाल अख्तर ने मांग रखी कि चूंकि प्रदेश में सभी धर्मों के त्योहार— होली, दीपावली, दशहरा और कांवड़ यात्रा— हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं, इसलिए रमजान के दौरान मस्जिदों से घोषणाओं (सहरी और इफ्तार) के लिए लाउडस्पीकर की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यह आपसी भाईचारे और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। विधायक अतुल प्रधान ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
मंत्री नरेंद्र कश्यप का दोटूक जवाब
सपा की इस मांग पर पलटवार करते हुए मंत्री नरेंद्र कश्यप ने स्पष्ट किया कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के दिशा-निर्देश बिल्कुल साफ हैं। उन्होंने कहा कि चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या अन्य कोई धार्मिक स्थल, सभी को कोर्ट द्वारा निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना होगा। मंत्री ने कहा कि नियम कानून से ऊपर कोई नहीं है और सरकार किसी भी विशेष समुदाय के लिए कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं करेगी।
ये भी पढ़ें CM योगी के बाद दोनों डिप्टी सीएम ने की मोहन भागवत से मुलाकात, यूपी में बड़े बदलाव के संकेत?भाजपा का रुख: भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह ने भी सदन में कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही पाबंदियां लगा रखी हैं, तो ऐसी मांग उठाना तर्कसंगत नहीं है। यदि किसी को आपत्ति है, तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
विपक्ष ने लगाया भेदभाव का आरोप
वहीं, सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने सरकार के इस रुख की आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर एक वर्ग विशेष के खिलाफ कार्य कर रही है। सपा नेताओं का कहना है कि प्रशासन को त्योहारों की संवेदनशीलता को समझते हुए व्यावहारिक रुख अपनाना चाहिए।
फिलहाल, इस मुद्दे पर छिड़ी बहस ने प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आगामी त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण और कानून-व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
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