विधान परिषद में भी गूंजा- अफसरों के फोन न उठाने का मामला, सभापति बोले-सभी जिलों में यही हाल है !
लखनऊ - उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाद अब उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भी अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा गूंज उठा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने एक स्वर में शिकायत की कि उनके-अपने जिलों में जिलाधिकारी (DM) से लेकर बिजली विभाग के अधिकारी तक फोन नहीं उठाते, जिससे जनसमस्याओं के समाधान में बाधा आ रही है।
इस पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आश्वासन दिया कि वे संबंधित जिलों के डीएम से सीधे बातचीत करेंगे और समस्या का समाधान कराने का प्रयास करेंगे।
इस पर सभापति ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति केवल कुछ जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के अधिकांश जिलों में यही हाल है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों के जिलाधिकारियों से इस विषय में बात कर स्थिति में सुधार लाया जाए।
शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शून्यकाल के दौरान मुद्दा उठाया कि जिलों के जिलाधिकारी सीयूजी नंबर खुद नहीं उठाते। उनके अर्दली फोन रिसीव करते हैं और जन प्रतिनिधियों के साथ बहस करते हैं। इसी क्रम में उमेश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने अपने जिले की डीएम को पांच महीनों में कई बार फोन किया, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि मैडम व्यस्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अधिकारी इतने कहां व्यस्त हैं कि उनके पास जन प्रतिनिधियों से बात करने का समय नहीं है। वहीं सुरेंद्र चौधरी ने बिजली विभाग के एमडी के पीआरओ द्वारा एमडी बनकर बात करने का गंभीर आरोप लगाया।
सदन में इस मुद्दे पर विपक्षी सदस्य जासमीर अंसारी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अधिकारी जब सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों की नहीं सुन रहे और उन्हें धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो विपक्ष की कौन सुनेगा। इस पूरे मामले पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सदन को आश्वस्त किया कि जिन सदस्यों ने शिकायत की है, वे उन जिलों के अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे। सभापति ने भी इसे प्रदेशव्यापी समस्या बताते हुए सरकार को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
कार्यवाही के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। केशव मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री थे और पूर्व ही रहेंगे। इस पर सपा एमएलसी भड़क गए और पलटवार करते हुए कहा कि 15 मार्च 2027 को अखिलेश यादव बतौर मुख्यमंत्री सदन में मौजूद होंगे। इसके अलावा, सदन में मंत्रियों की अनुपस्थिति को लेकर भी सभापति ने नाराजगी जताई। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के देरी से पहुंचने पर सभापति ने उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
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