आउटसोर्सिंग पर सरकार घिरी! — युवाओं को स्थायी नौकरी की सपा विधायक रागिनी सोनकर ने उठाई मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आउटसोर्सिंग के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी की प्रखर वक्ता और मछलीशहर से विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने सदन में युवाओं की आवाज उठाते हुए आउटसोर्सिंग व्यवस्था को 'युवा विरोधी' करार दिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि आउटसोर्सिंग के नाम पर युवाओं का शोषण बंद कर उन्हें सम्मानजनक और स्थायी नौकरियां दी जाएं।
आउटसोर्सिंग नहीं, यह युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: डॉ. रागिनी
सदन में अपने संबोधन के दौरान डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा कि आज प्रदेश का शिक्षित युवा सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर है। सरकार स्थायी भर्ती निकालने के बजाय आउटसोर्सिंग के जरिए पद भर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में न तो वेतन की कोई गारंटी है और न ही भविष्य की सुरक्षा। रागिनी ने सवाल उठाया कि जब समान कार्य किया जा रहा है, तो आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और नियमित कर्मचारियों के वेतन में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का लगाया आरोप
सपा विधायक ने आउटसोर्सिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजी एजेंसियां युवाओं के वेतन में से भारी कमीशन काटती हैं, जिससे कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि बेहद कम हो जाती है। रागिनी सोनकर ने जोर देकर कहा कि आउटसोर्सिंग प्रथा केवल बिचौलियों और निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने का जरिया बन गई है, जबकि मेहनत करने वाला युवा कर्ज और गरीबी के जाल में फंसता जा रहा है।
आरक्षण के मुद्दे पर भी घेरा
डॉ. रागिनी सोनकर ने आउटसोर्सिंग नौकरियों में आरक्षण की अनदेखी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के जरिए पिछड़ों, दलितों और वंचितों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है क्योंकि इन भर्तियों में आरक्षण नियमों का पालन पारदर्शी तरीके से नहीं होता। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी रिक्त पदों पर विज्ञापन निकालकर नियमित नियुक्तियां सुनिश्चित करे।
सरकार का पक्ष
विपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से तेजी से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं और इससे सरकारी कामकाज में दक्षता आई है। हालांकि, रागिनी सोनकर के तर्कों के सामने सत्ता पक्ष को बचाव की मुद्रा में देखा गया। सदन में मौजूद अन्य विपक्षी दलों ने भी डॉ. रागिनी की मांगों का समर्थन किया और 'आउटसोर्सिंग मुक्त उत्तर प्रदेश' के नारे लगाए।
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