उत्तर प्रदेश में कुदरत का कहर: लखनऊ-अयोध्या में ओले गिरे, आकाशीय बिजली से 5 की मौत, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुक्रवार सुबह राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश हुई। अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर और सिद्धार्थनगर समेत कई जिलों में ओले गिरने से मौसम पूरी तरह बदल गया। इस प्राकृतिक आपदा के बीच प्रयागराज, बलरामपुर, बहराइच और मिर्जापुर में आकाशीय बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में तीन किसानों सहित कुल पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ बारिश का यह दौर अब पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान मथुरा में सबसे तेज 87 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं दर्ज की गईं, जबकि नोएडा, आगरा और बुलंदशहर में भी हवा की गति 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रही। सबसे अधिक बारिश बागपत और बुलंदशहर में रिकॉर्ड की गई है। काशी में भी धूलभरी आंधी के साथ बूंदाबांदी हुई, जिससे घाटों पर दुकान लगाने वाले व्यापारियों को अपना सामान समेटकर लौटना पड़ा।
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसलें तेज हवा के दबाव से बिछ गई हैं, वहीं सरसों और आलू की फसलों पर भी बर्बादी का खतरा मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि कटाई के समय हुई इस बारिश से भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सुबह दफ्तर जाने वाले लोग और स्कूली बच्चे रेनकोट व छतरियों के सहारे गंतव्य तक पहुंचते नजर आए।
मौसम विभाग के अनुसार अफगानिस्तान के पास सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले दो दिनों तक बना रहेगा। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है। इस बदलाव से अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल दो दिन बाद ही मौसम के सामान्य होने के आसार जताए गए हैं। प्रशासन ने आकाशीय बिजली और तेज आंधी को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
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