हापुड़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, तीन महीने बाद कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई लूट की एफआईआर
हापुड़। जनपद के थाना देहात क्षेत्र में पिछले वर्ष दिसंबर में हुई एक लूट की घटना को दबाने के पुलिसिया प्रयासों पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। गाजियाबाद के एक निवासी के साथ हुई मारपीट और लूटपाट के मामले में तीन महीने तक टालमटोल करने के बाद, अब कोर्ट के हस्तक्षेप पर पुलिस ने नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस की इस ढुलमुल कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
पीड़ित मोहम्मद शमीम निवासी विजयनगर गाजियाबाद ने बताया कि दो दिसंबर दो हजार पच्चीस की शाम वह बाइक से हापुड़ के आवास विकास मार्ग से होते हुए मेरठ की ओर जा रहे थे। रास्ते में कार और बाइक सवार पांच बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और गाली गलौज करते हुए बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। आरोप है कि बदमाशों ने सिर पर पिस्टल और तमंचा तानकर जान से मारने की धमकी दी और शमीम से उनका मोबाइल, सोने की चेन, घड़ी और साढ़े तीन हजार रुपये नकद लूट लिए। राहगीरों को अपनी ओर आता देख आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।
ये भी पढ़ें सहारनपुर और देवबंद में श्रद्धालुओं ने बड़े धूमधाम से मनाई महाशिवरात्रि, मंदिरों में जलाभिषेकघटना के तुरंत बाद पीड़ित न्याय के लिए थाने पहुंचा लेकिन हापुड़ देहात पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय उसे चलता कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने जनवरी में पुलिस अधीक्षक से भी गुहार लगाई परंतु वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस प्रशासन से निराश होकर अंततः पीड़ित ने तेरह जनवरी को न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए।
न्यायालय के कड़े रुख के बाद पुलिस ने अब हाफिजपुर निवासी इस्लामुद्दीन, सलाउद्दीन, भोजपुर के वसीम खान, बीरचंद त्यागी और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि इस घटना ने जिले की कानून व्यवस्था और पीड़ितों की सुनवाई न होने की कड़वी सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
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