सील खोलने के बदले फर्जी रसीद का खेल, नगर निगम की वसूली प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
14 लाख रुपये की बकाया वसूली को लेकर की गई थी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद के पावर हाउस क्षेत्र में लगभग 14 लाख रुपये की बकाया राजस्व वसूली को लेकर नगर निगम की टीम ने अभियान चलाया था। इस दौरान राजस्व निरीक्षक की मौजूदगी में चार दुकानों, एक मकान और एक गोदाम को सील किया गया था। अधिकारियों के अनुसार कुल लगभग 45 बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कथित लेनदेन के चलते कुछ प्रतिष्ठानों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई गई।
गोदाम सीलिंग के बाद दी गई संदिग्ध रसीद से बढ़ा विवाद
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब आरोप लगा कि एक गोदाम को सील करने के लिए पांच राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। कार्रवाई के बाद गोदाम मालिक द्वारा भुगतान किए जाने पर उन्हें राजस्व निरीक्षक के नाम से हस्ताक्षर कर एक रसीद दी गई, जो बाद में संदिग्ध पाई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने आधिकारिक रसीद की मांग की तो संबंधित कर्मियों ने कागज पर हस्ताक्षर कर एक रसीद थमा दी, जिसमें राजस्व निरीक्षक के नाम का उपयोग किया गया। बाद में इस रसीद की सत्यता पर सवाल उठने लगे, जिससे पूरे मामले में फर्जीवाड़े की आशंका गहरा गई।
ऑनलाइन शिकायत में संगठित वसूली खेल का आरोप
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शिकायत ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम के भीतर फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से वसूली का एक संगठित तंत्र संचालित किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि बकायेदारों पर दबाव बनाकर रकम वसूली की जा रही है और आधिकारिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ सकता है, जिससे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई संभव है।
सीलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि सीलिंग कार्रवाई का उद्देश्य केवल बकाया राजस्व की वसूली और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है। लेकिन यदि इस प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज और अवैध लेनदेन का इस्तेमाल हो रहा है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी तंत्र की साख को प्रभावित करती हैं और आम जनता का भरोसा कमजोर करती हैं।
नगर निगम की प्रतिक्रिया का इंतजार, जांच की मांग तेज
मामले में प्रतिक्रिया के लिए नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषकर अपर नगर आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर निगम प्रशासन इस शिकायत की जांच किस स्तर पर करता है और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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