सहारनपुर में हाजी इकबाल पर बड़ा एक्शन: 2.76 अरब की 56 संपत्तियां कुर्क; डीएम ने जारी किए आदेश
सहारनपुर। सहारनपुर जिला प्रशासन ने बसपा के पूर्व एमएलसी व सपा बसपा सरकार के समय के खनन माफिया, गैंगस्टर मोहम्मद इकबाल उर्फ बाला की अवैध रूप से अर्जित 56 सम्पत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश गिरोहबन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 की धारा 14 (1) के तहत डीएम मनीष बंसल के आदेश पर की गई। कुर्क की गई सम्पत्तियों के प्रबंधन के लिए तहसीलदार बेहट को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, मोहम्मद इकबाल उर्फ बाला एक संगठित गिरोह का सरगना है। उसके बेटे मोहम्मद जावेद, मोहम्मद वाजिद, अलीशान, अफजाल और अन्य सहयोगी भी इस गिरोह में शामिल हैं। इनके खिलाफ वर्ष 2022 में थाना मिर्जापुर में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इकबाल पर जनपद, गैर जनपद और गैर राज्य के विभिन्न थानों में लगभग 50 मुकदमें दर्ज हैं।
जांच में सामने आया कि गिरोह ने वन क्षेत्रों से खैर समेत अन्य लकड़ी की चोरी, तस्करी, अवैध खनन और जमीनों पर अवैध कब्जे जैसे अपराध किए। आरोप है कि इन अवैध गतिविधियों से अर्जित धन का उपयोग सरकारी और निजी जमीनों को डराने-धमकाने तथा धोखाधड़ी के जरिए खरीदने या कब्जाने में किया गया। इसी अवैध कमाई से करोड़ों रुपये की सम्पत्तियां बनाई गईं।
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प्रशासनिक आंकलन के अनुसार, कुर्क की गई इन जमीनों की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 2 अरब 76 करोड़ रुपये है। ये सम्पत्तियां इकबाल, उसके परिजनों, आश्रितों और विभिन्न कंपनियों व सहयोगियों के नाम पर दर्ज थीं। विस्तृत जांच के बाद सभी 56 सम्पत्तियों को अवैध आय से अर्जित माना गया और उन्हें कुर्क कर लिया गया।
जिलाधिकारी के आदेश में कहा गया है कि प्रशासक नियुक्त तहसीलदार बेहट कुर्क सम्पत्तियों का उचित और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संगठित अपराध और अवैध संपत्ति के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि अपराधियों के आर्थिक आधार को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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