यूपी: गो-सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले होंगे सम्मानित, सीएम योगी ने दिए 'आत्मनिर्भर गो-आश्रय' के निर्देश
हर गौशाला का होगा अपना 'भूसा बैंक', सीसीटीवी और सीएसआर फंड से मजबूत होगी निगरानी व्यवस्था

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में गो-वंश संरक्षण और गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को गोसेवा आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि गो-रक्षा एवं गो-आश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने में योगदान देने वाली विभूतियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गो-सेवा केवल आस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक खेती का आधार है।
मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि गोसेवा आयोग के पदाधिकारी 2-2 के समूह में पूरे प्रदेश का भ्रमण करें। उन्होंने विभागीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी फील्ड में उतरकर जमीनी हकीकत परखने को कहा है। आयोग के पदाधिकारियों को मंडलवार निरीक्षण कर 'भूसा बैंक' की स्थापना और गोचर भूमि के विस्तार की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपनी होगी।
अब सीसीटीवी की जद में होंगी गौशालाएं
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी 7,527 गो-आश्रय स्थलों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए सीएसआर फंड के प्रभावी उपयोग पर बल दिया। वर्तमान में 74 जनपदों के 5,446 स्थलों पर 7,592 कैमरे लगाए जा चुके हैं और 52 जिलों में कमांड एंड कंट्रोल रूम सक्रिय हैं।
यूपी में गो-वंश संरक्षण के प्रमुख आंकड़े:
कुल गो-आश्रय स्थल: 7,527
संरक्षित गो-वंश: 12.39 लाख से अधिक
सहभागिता योजना: 1.83 लाख गोवंश 1.14 लाख लाभार्थियों को सुपुर्द।
गोचर भूमि: 61,118 हेक्टेयर उपलब्ध, जिसमें से 7,364 हेक्टेयर में हरा चारा विकसित।
आत्मनिर्भरता का मॉडल: गोबर गैस और गो-उत्पाद
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 97 गोबर गैस संयंत्र संचालित हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और आय का जरिया बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट और गो-दीप जैसे उत्पादों की सराहना करते हुए मुजफ्फरनगर के गो-अभयारण्य को एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
टीकाकरण और स्वास्थ्य पर जोर
पशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने खुरपका-मुंहपका, गलाघोटू और लंपी स्किन डिजीज के विरुद्ध व्यापक टीकाकरण अभियान जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डीबीटी प्रणाली के माध्यम से भरण-पोषण का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए और प्रत्येक केंद्र पर गोवंश की दैनिक संख्या का अनिवार्य रजिस्टर रखा जाए।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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