शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे तेवर: बोले- 'योगी खुद को हिंदू साबित नहीं कर पा रहे, गोमाता के लिए अब होगा धर्मयुद्ध'
काशी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोलते हुए गोवंश की रक्षा और उन्हें 'राष्ट्रमाता' घोषित करने के मुद्दे पर धर्मयुद्ध का शंखनाद कर दिया है। काशी में पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री को खुद को 'असली हिंदू' साबित करने के लिए जो 40 दिन का समय दिया गया था, उसमें से 30 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से गोमाता के सम्मान में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
11 मार्च को लखनऊ में शंखनाद की तैयारी
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि अब प्रतीक्षा की घड़ियां समाप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा, "40 दिन की अवधि बीतने के बाद 41वें दिन हम लखनऊ कूच करेंगे और गोमाता की प्रतिष्ठा के लिए धर्मयुद्ध का शंखनाद करेंगे। अब केवल 10 दिन शेष हैं, जो आशा की अंतिम प्रतीक्षा है। 11 मार्च को यह तय हो जाएगा कि कौन गाय के पक्ष में है और कौन विपक्ष में।" उन्होंने मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर भी तंज कसते हुए कहा कि बहुसंख्यक समाज की भावनाओं की अनदेखी कर विदेश यात्रा का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।
'हमने 12 घंटे में जवाब दिया, वे 30 दिन में भी मौन'
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पद की वैधता पर उठे सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि जब हमसे पूछा गया कि हम शंकराचार्य कैसे हैं, तो हमने 12 घंटे में उत्तर दिया। लेकिन जब हमने भगवा वस्त्र पहनकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे आदित्यनाथ जी से पूछा कि आप बताओ कि आप असली हिंदू कैसे हो, तो 30 दिन बाद भी उनकी ओर से कोई स्पष्टता नहीं आई है। उन्होंने कहा कि समाज में कुछ 'कालनेमि' आ गए हैं जिनकी पहचान जरूरी है।
इजराइल-ईरान युद्ध को बताया पाखंड का नतीजा
वैश्विक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला संसार में बढ़ते पाखंड का परिणाम है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए कहा कि जो युद्ध का सारा इंतजाम करता है, वही शांति के नोबेल पुरस्कार की बात करता है; यह कोरा ढोंग है। शंकराचार्य के अनुसार, जब तक धर्मयुद्ध (अन्याय के विरुद्ध सत्य की लड़ाई) नहीं होगा, तब तक इस तरह के विनाशकारी भौतिक युद्ध होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गोमाता को काट-काटकर अंग्रेजों को परोसना घृणित है और इसी व्यवस्था को बदलने के लिए अब धर्मयुद्ध अनिवार्य हो गया है।
शंकराचार्य के इस कड़े रुख के बाद प्रदेश की सियासत और धार्मिक हल्कों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें 11 मार्च की समय सीमा पर टिकी हैं।
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