- 'कौन जात हो भाई ?'
- 'मजदूर जात हैं साहब … वैसे मजदूर की भी कोई जात होती है क्या ?'
- 'जात तो सबकी होती है।'
- 'होती होगी साहब .. हम तो मजदूर जात हैं।
- 'क्या सच में तुम्हारी कोई जात नहीं ?
- 'है साहब ,,, गरीब जात।'
- 'यह तो कोई जात नहीं होती।'
- 'होती हैं साहब, सिर्फ दो जात होती हैं,एक अमीर जात, दूसरी गरीब।'
- 'तुमने सुना नहीं, कि कोई है, जो देश भर में जात की गिनती कराने की लड़ाई लड़ रहा है, कह रहा है कि हर जात की गिनती कराऊंगा।'
- ' कौन जात का है ?'
- ' सुना है, उसकी भी अपनी कोई जात नहीं है।'
- 'साहब जरूर कोई भरे पेट वाला अमीर जात का होगा।'
- 'तुम्हें कैसे पता, कि अमीर जात का होगा ?'
- 'साहब, जिसका पेट भरा हो,जो खाली दिमाग हो, उसे ही शैतानी सूझती है।'
- 'शायद .... तुम ठीक कहते हो।'
- 'शायद नहीं, पूरी तरह ठीक, जिसमें आदमियत नहीं होती, वही आदमी में जात पात ढूंढता है, आम आदमी को रोजी रोटी कमाने से फुर्सत ही कहाँ है, जो जात जात खेले ?'
- 'तू तो बड़ा समझदार निकला रे ....।'
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