भारत-अमेरिका के बीच 'ऐतिहासिक' व्यापार समझौता: टैरिफ में भारी कटौती और बाजार पहुंच के ढांचे पर बनी सहमति, PM मोदी ने बताया 'बड़ी खुशखबरी'
'मेक इन इंडिया' को मिलेगी नई उड़ान, बादाम-अखरोट और अमेरिकी उत्पादों पर घटेगा शुल्क; भारत खरीदेगा $500 अरब का सामान
नयी दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। दोनों राष्ट्र एक 'अंतरिम व्यापार समझौते' के ढांचे (फ्रेमवर्क) पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते के तहत भारी शुल्क कटौती, व्यापक बाजार पहुंच और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में अभूतपूर्व सहयोग का वादा किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटनाक्रम का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के आर्थिक भविष्य के लिए "बड़ी खुशखबरी" करार दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता हमारे मेहनती किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और मछुआरों के लिए नए अवसर खोलेगा। पीएम ने जोर देकर कहा कि इस समझौते से भारत में महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे और यह 'मेक इन इंडिया' अभियान को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।
किसे क्या मिलेगा: शुल्क कटौती का गणित
समझौते के तहत भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों (जैसे बादाम, अखरोट, ताजे फल, वाइन और सोयाबीन तेल) पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा। बदले में, अमेरिका भारतीय निर्यात जैसे कपड़ा, चमड़ा, जूते, हस्तशिल्प और मशीनरी पर लगाए गए शुल्कों को पारस्परिक रूप से वापस लेगा। विशेष रूप से, जेनेरिक दवाओं, रत्नों, हीरों और विमान के कलपुर्जों पर से शुल्क पूरी तरह हट जाएगा। साथ ही, भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पादों, विमानों और तकनीकी सामानों की खरीद की योजना बनाई है।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित
केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जहां यह समझौता व्यापार की नई राहें खोलेगा, वहीं भारत के संवेदनशील क्षेत्रों (Sensitive Sectors) की रक्षा के लिए टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) जैसे पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं। यह अंतरिम समझौता भविष्य में एक पूर्ण और व्यापक व्यापार समझौते (बीटीए) की नींव रखेगा। तकनीक, डेटा सेंटर और डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर बाधाएं दूर करेंगे, जिससे वैश्विक विकास में भारत की हिस्सेदारी और अधिक बढ़ेगी।
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