मार्च में करें इन ग्रीष्मकालीन सब्जियों की खेती किसानों को मिल सकती है अच्छी कमाई

मार्च का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस समय रबी फसलों की कटाई का काम शुरू हो जाता है और कई खेत खाली होने लगते हैं। ऐसे में किसान इस खाली समय का फायदा उठाकर ग्रीष्मकालीन सब्जियों की खेती से अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं। खेती के जानकार बताते हैं कि मार्च का दूसरा पखवाड़ा सब्जियों की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय होता है।
इस मौसम में कई ऐसी सब्जियां होती हैं जिनकी मांग बाजार में काफी अधिक रहती है। अगर किसान सही किस्मों का चयन करते हैं और समय पर बुवाई करते हैं तो उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल सकता है।
मार्च के अंत तक करें ग्रीष्मकालीन सब्जियों की बुवाई
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जो किसान गर्मी के मौसम में सब्जियों की खेती करना चाहते हैं उन्हें मार्च के अंत तक बुवाई जरूर कर लेनी चाहिए। समय पर बुवाई करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और फसल भी बेहतर मिलती है।
बुवाई के बाद खेत में नियमित सिंचाई करना भी जरूरी होता है। आमतौर पर छह से सात दिन के अंतराल पर सिंचाई करने की सलाह दी जाती है ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहे और उनकी वृद्धि अच्छी तरह हो सके।
ये भी पढ़ें Palak Ki Kheti से किसानों को शानदार मुनाफा कम लागत में तैयार होने वाली फसल बदल रही किसानों की किस्मतइन उन्नत किस्मों से बढ़ सकता है उत्पादन
गर्मी के मौसम में कई बेल वाली सब्जियां अच्छी पैदावार देती हैं। अगर किसान उन्नत किस्मों का चयन करते हैं तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकते हैं। लौकी की खेती के लिए पूसा नवीन पूसा संदेश अर्का वहार पूसा समृद्धि और पूसा संतुष्टि जैसी किस्में बेहतर मानी जाती हैं। कद्दू की खेती के लिए पूसा विश्वास और पूसा विकास किस्में अच्छी पैदावार देती हैं।
करेले की खेती के लिए पूसा विशेष और पूसा दो मौसमी किस्में लोकप्रिय हैं। तोरई की खेती में पूसा सुप्रिया पूसा चिकनी पूसा नूतन और पूसा नसदार अच्छी किस्में मानी जाती हैं। खीरे की खेती के लिए पूसा संयोग पूसा बरखा और पूसा उदय किस्में अच्छी मानी जाती हैं। टिंडा की खेती के लिए पंजाब अर्का टिंडा किस्म बेहतर उत्पादन दे सकती है। वहीं तरबूज की खेती के लिए अर्का मधु और हरा मधु किस्मों को उपयुक्त माना जाता है।
बीज बुवाई से पहले अपनाएं सही तकनीक
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान छह से साढ़े सात के बीच होना चाहिए।
बुवाई से पहले बीजों को रोगों से बचाने के लिए उपचारित करना जरूरी होता है। बीजों को काबेंडाजिम या मैन्कोजेब की निर्धारित मात्रा से उपचारित करने से फसल को शुरुआती रोगों से बचाया जा सकता है।
खेत की अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाना भी जरूरी है। इसके बाद मिट्टी परीक्षण के अनुसार गोबर की खाद कम्पोस्ट या अन्य उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण मिल सके।
खेत की तैयारी और कतार दूरी का रखें ध्यान
सब्जियों की खेती में खेत की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। किसानों को खेत में नालियां या उठी हुई क्यारियां बनाकर बुवाई करनी चाहिए ताकि पानी का निकास सही तरीके से हो सके। आमतौर पर खेत में चालीस से पचास सेंटीमीटर चौड़ी और तीस से चालीस सेंटीमीटर गहरी नालियां बनानी चाहिए। बेल वाली फसलों में दो कतारों के बीच दो से चार मीटर की दूरी रखना बेहतर माना जाता है जिससे पौधों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
भिंडी की खेती भी दे सकती है अच्छा लाभ
गर्मी के मौसम में भिंडी की खेती भी किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। भिंडी की बुवाई का सही समय मार्च के अंत तक माना जाता है। भिंडी की उन्नत किस्मों में परभनी क्रांति अर्का अभय वी आर ओ पांच वी आर ओ छह और अर्का अनामिका शामिल हैं। बुवाई से पहले बीजों को रोगों से बचाने के लिए उपचारित करना जरूरी होता है ताकि पीला मोजेक रोग से बचाव किया जा सके।
भिंडी की खेती में कतार से कतार की दूरी पच्चीस से तीस सेंटीमीटर और पौध से पौध की दूरी पंद्रह से बीस सेंटीमीटर रखना उचित माना जाता है। इससे पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।
सही खाद और उर्वरक से बढ़ेगा उत्पादन
सब्जियों की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी के समय अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग पंद्रह से बीस टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर खेत में मिलाना लाभदायक होता है।
इसके अलावा नत्रजन फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग भी जरूरी है। सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने से पौधों की वृद्धि तेज होती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
गर्मी के मौसम में सब्जियों की खेती से बढ़ सकती है आमदनी
गर्मी के मौसम में सब्जियों की मांग बाजार में काफी अधिक रहती है। अगर किसान सही समय पर बुवाई करते हैं और उन्नत तकनीक अपनाते हैं तो उन्हें अच्छी पैदावार मिल सकती है। इस तरह किसान खाली खेतों का सही उपयोग कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं और खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां