Palak Ki Kheti से किसानों को शानदार मुनाफा कम लागत में तैयार होने वाली फसल बदल रही किसानों की किस्मत

आज के समय में खेती में बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है। अब कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह ऐसी सब्जियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं जिनसे कम समय में अच्छी कमाई हो सके। इसी बदलाव के बीच पालक की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आई है।
गर्मी के मौसम में पालक की मांग काफी बढ़ जाती है क्योंकि यह सेहत के लिए फायदेमंद और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी मानी जाती है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा परेशानी नहीं होती।
बाराबंकी के किसान की मेहनत से मिली सफलता
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बडेल गांव के किसान मंगल प्रसाद मौर्या पिछले कई वर्षों से साग सब्जियों की खेती कर रहे हैं। पहले वे धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे लेकिन उसमें मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम दिखाई देता था।
इसके बाद उन्होंने सब्जियों की खेती शुरू करने का फैसला लिया और पालक की खेती को अपनाया। आज वे करीब डेढ़ बीघा खेत में पालक उगाते हैं और एक फसल से लगभग तीस से चालीस हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के किसान भी अब सब्जियों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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किसान मंगल मौर्या के अनुसार पालक की खेती में लागत बहुत कम आती है। एक बीघा खेत में बीज और खाद मिलाकर लगभग दो हजार से ढाई हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसके बाद फसल तैयार होने पर मिलने वाला मुनाफा लागत से कई गुना अधिक हो सकता है।
गर्मियों के मौसम में हरी सब्जियों की मांग बढ़ जाती है और ऐसे समय में पालक की कीमत भी अच्छी मिलती है। लोग इसे साग और सब्जी के साथ साथ जूस बनाने में भी इस्तेमाल करते हैं इसलिए इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
मात्र 35 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
पालक की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद जमीन को समतल किया जाता है और फिर बीजों की बुवाई कर दी जाती है।
जब पौधे थोड़े बड़े हो जाते हैं तब उनकी सिंचाई की जाती है जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है। बुवाई के लगभग पैंतीस से चालीस दिनों के भीतर फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। एक बार जब पालक की कटाई शुरू हो जाती है तो करीब एक महीने तक लगातार उपज मिलती रहती है जिससे किसानों को लंबे समय तक आमदनी होती रहती है।
कम देखभाल में भी मिलती है अच्छी पैदावार
पालक की खेती की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती। अन्य फसलों की तुलना में इसमें बहुत ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती और महंगे कीटनाशकों का भी अधिक उपयोग नहीं करना पड़ता।
यही कारण है कि अब कई किसान पारंपरिक खेती के साथ साथ पालक जैसी सब्जियों की खेती भी करने लगे हैं। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल खेत को लंबे समय तक खाली नहीं रहने देती और किसानों को लगातार आय देती रहती है। अगर किसान सही तरीके से पालक की खेती करें तो कम मेहनत और कम लागत में भी अच्छी कमाई करना संभव हो सकता है।
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