FBI के पूर्व निदेशक रॉबर्ट मुलर का 81 वर्ष की उम्र में निधन; राष्ट्रपति ट्रंप का विवादित तंज— "खुशी है कि वह मर गए"

वॉशिंगटन (अमेरिका)। अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी (FBI) के पूर्व निदेशक और चर्चित विशेष जांच अधिकारी रॉबर्ट मुलर का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मुलर के परिवार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस दुखद समाचार की पुष्टि की है, हालांकि उनकी मृत्यु के कारणों का अभी खुलासा नहीं किया गया है।
लेकिन, मुलर के निधन के साथ ही अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के बजाय तीखा तंज कसा है।
ट्रंप का 'एक्स' पोस्ट: "अब वह निर्दोषों को नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे"
रॉबर्ट मुलर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच के कड़वे रिश्तों की गूंज उनके निधन के बाद भी सुनाई दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा:
"अच्छा हुआ, मुझे खुशी है कि वह मर गए। अब वह निर्दोष लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।"
ट्रंप की इस टिप्पणी ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी खेमे ने इसे एक दिवंगत सार्वजनिक सेवक के प्रति "अमर्यादित" व्यवहार करार दिया है।
क्यों था ट्रंप और मुलर में विवाद?
रॉबर्ट मुलर विशेष रूप से उस हाई-प्रोफाइल जांच के लिए जाने जाते हैं, जिसका उन्होंने 2017 से 2019 तक नेतृत्व किया था। मुलर ने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप अभियान और रूस के बीच कथित संबंधों की करीब दो साल तक जांच की थी। हालांकि इस जांच में सीधे तौर पर 'सांठगांठ' के सबूत नहीं मिले थे, लेकिन इसने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारी राजनीतिक उथल-पुथल मचाई थी।
रॉबर्ट मुलर: एक लंबा और ऐतिहासिक करियर
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छठे FBI निदेशक: रॉबर्ट मुलर अमेरिका के छठे एफबीआई निदेशक थे।
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नियुक्ति: उन्हें 4 सितंबर 2001 (9/11 हमले से ठीक पहले) तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने नामित किया था।
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कार्यकाल: उन्होंने करीब 12 वर्षों तक इस चुनौतीपूर्ण पद पर कार्य किया और 2013 में सेवानिवृत्त हुए। उन्हें अमेरिका की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के आधुनिकीकरण का श्रेय दिया जाता है।
परिवार ने बयान में कहा है, "गहरे दुख के साथ हम साझा कर रहे हैं कि बॉब (मुलर) का कल रात निधन हो गया। हम इस कठिन समय में परिवार की निजता का सम्मान करने का अनुरोध करते हैं।"
मुलर बनाम ट्रंप – एक ऐतिहासिक कड़वाहट की पूरी कहानी
यह केवल एक जांच नहीं थी, बल्कि दो शक्तिशाली व्यक्तित्वों और अमेरिकी संस्थानों के बीच की जंग थी। एक तरफ रॉबर्ट मुलर थे—जिन्हें 'मौन और सख्त' कानून का सिपाही माना जाता था, और दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप—जो अपनी आक्रामक राजनीति और सोशल मीडिया प्रहारों के लिए जाने जाते थे।
घटनाक्रम की टाइमलाइन (2017 - 2026)
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17 मई, 2017: मुलर की नियुक्ति ट्रंप द्वारा एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी को बर्खास्त करने के बाद, न्याय विभाग ने रॉबर्ट मुलर को 'विशेष काउंसिल' नियुक्त किया। उनका काम 2016 के चुनावों में रूसी हस्तक्षेप और ट्रंप अभियान की साठगांठ की जांच करना था।
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ट्रंप की प्रतिक्रिया: "यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा 'विच हंट' (Witch Hunt) है।"
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2017 - 2018: कानूनी शिकंजा मुलर की जांच के दौरान ट्रंप के कई करीबी सहयोगियों (पॉल मैनफोर्ड, माइकल फ्लिन, रोजर स्टोन) पर शिकंजा कसा गया। कई को जेल हुई। ट्रंप ने लगातार मुलर की टीम को "पक्षपाती डेमोक्रेट्स" करार दिया।
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24 मार्च, 2019: मुलर रिपोर्ट का सारांश मुलर ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि रूस ने हस्तक्षेप तो किया, लेकिन ट्रंप अभियान के साथ 'साठगांठ' के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। हालांकि, 'न्याय के मार्ग में बाधा' (Obstruction of Justice) के मुद्दे पर मुलर ने ट्रंप को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं दी।
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24 जुलाई, 2019: मुलर की गवाही मुलर ने कांग्रेस (संसद) के सामने गवाही दी। उन्होंने साफ कहा— "हमारी रिपोर्ट राष्ट्रपति को दोषी नहीं ठहराती, लेकिन उन्हें दोषमुक्त (Exonerate) भी नहीं करती।"
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2020 - 2024: वैचारिक युद्ध जारी पद छोड़ने के बाद भी ट्रंप अपनी रैलियों में मुलर को "भ्रष्ट" और "धोखेबाज" कहते रहे। वहीं मुलर ने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली और चुप्पी साधे रखी।
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22 मार्च, 2026: अंतिम प्रहार रॉबर्ट मुलर के निधन की खबर आते ही ट्रंप ने सारी मर्यादाएं तोड़ते हुए 'एक्स' पर लिखा— "अच्छा हुआ वह मर गए।" यह बयान इस कड़वाहट के चरम को दर्शाता है।
बैकग्राउंड स्टोरी: क्यों था इतना विवाद?
1. 'डीप स्टेट' बनाम 'चुनी हुई सरकार': ट्रंप का मानना था कि मुलर 'डीप स्टेट' (प्रशासन के अंदर छिपे विरोधियों) के मोहरे हैं जो उनकी जीत को पचा नहीं पा रहे हैं। वहीं मुलर का तर्क था कि वह केवल अमेरिकी लोकतंत्र की रक्षा कर रहे हैं।
2. दो अलग कार्यशैलियाँ: मुलर एक 'वियतनाम वॉर' के दिग्गज थे, जो नियम-कायदों पर चलते थे। ट्रंप एक 'बिजनेस टाइकून' थे, जो नियमों को चुनौती देकर अपनी राह बनाना जानते थे।
3. न्याय में बाधा का प्रश्न: मुलर की जांच का सबसे विवादास्पद हिस्सा यह था कि क्या ट्रंप ने जांच को रोकने की कोशिश की? मुलर ने इस पर फैसला संसद पर छोड़ दिया था, जिसे ट्रंप ने अपनी 'पूर्ण जीत' बताया था।
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