होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: ईरान ने कहा— 'मार्ग बंद नहीं, केवल चुनिंदा जहाजों पर पाबंदी'; 22 देशों ने जताई सुरक्षा की चिंता

तेहरान/लंदन। पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवन रेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। जहाँ एक ओर ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसने जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया है, वहीं दूसरी ओर दुनिया के 22 शक्तिशाली देशों ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संयुक्त मोर्चा खोलने के संकेत दिए हैं।
ईरान का रुख: "पूर्ण युद्धविराम ही एकमात्र समाधान"
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने जापान की 'क्योदो न्यूज़ एजेंसी' को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। उनके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
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सुरक्षित मार्ग: ईरान केवल चुनिंदा (प्रतिबंधित) जहाजों को रोक रहा है, जबकि जापान जैसे सहयोगी देशों और अन्य तटस्थ जहाजों के लिए मार्ग सुरक्षित है।
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शर्तें: तेहरान किसी अस्थायी समाधान के बजाय "पूर्ण, व्यापक और स्थायी युद्ध समाप्ति" चाहता है।
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आत्मरक्षा: अराकची ने अमेरिका-इजराइल की कार्रवाई को 'अवैध' बताते हुए कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल आत्मरक्षा के लिए है।
वैश्विक संकट: 95% तक गिरी जहाजों की आवाजाही
लंदन और ब्रुसेल्स से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से जारी इस संघर्ष ने समुद्री व्यापार की कमर तोड़ दी है:
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आंकड़े: 01 से 19 मार्च के बीच इस मार्ग से केवल 116 जहाजों की आवाजाही हुई, जो सामान्य स्थिति की तुलना में 95% कम है।
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आर्थिक असर: चूंकि दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए इस अवरोध ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।
22 देशों का संयुक्त बयान: सैन्य हस्तक्षेप के संकेत?
ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया सहित 20 से अधिक देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान की कार्रवाई की निंदा की है।
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सुरक्षा गारंटी: इन देशों ने नागरिक जहाजों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है।
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रणनीति: बयान में कहा गया है कि ये देश सुरक्षित नौवहन (Safe Navigation) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सैन्य या कूटनीतिक कदमों में भाग लेने के लिए प्रारंभिक योजनाएं बना रहे हैं।
पृष्ठभूमि: क्यों गहराया संकट?
यह संकट 28 फरवरी, 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में सामरिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व अर्थव्यवस्था एक बड़े मंदी के दौर में फंस सकती है।
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