बैंकों में ₹60,518 करोड़ का कोई वारिस नहीं; RBI को ट्रांसफर हुई 'अनक्लेम्ड' राशि: पंकज चौधरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने 60,518 करोड़ रूपये की बिना दावा वाली राशि जनवरी के अंत तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के 'खाताधारकों की शिक्षा एवं जागरूकता कोष’ (डीईए) में स्थानांतरित की है।
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीमा कंपनियों के पास फरवरी के अंत तक दावा न की गई बीमा राशि 8,973.89 करोड़ रूपये थी। साथ ही सेबी नियमों के तहत म्युचल फण्ड में दावा न की गई राशि का मूल्य 3,749.34 करोड़ रूपये था।
पंकच चौधरी ने सदन को बताया कि वित्तीय क्षेत्र के नियामकों ने लावारिस वित्तीय संपत्तियों के लिए कई कदम उठाए हैं। इन उपायों का मुख्य लक्ष्य सही दावेदारों की पहचान को समय पर सुनिश्चित करना है। इसका उद्देश्य लावारिस संपत्तियों के मौजूदा स्टॉक को कम करना भी है। इसके साथ ही इसमें नई लावारिस राशियों के जमा होने को भी रोकना शामिल है। नागरिकों के लिए दावा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर भी जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सही दावेदारों की समय पर पहचान सुनिश्चित करने, दावा न की गई वित्तीय संपत्तियों के मौजूदा स्टॉक और उसमें होने वाली नई बढ़ोतरी, दोनों को कम करने तथा नागरिकों के लिए दावा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के वास्ते वित्तीय क्षेत्र के नियामकों द्वारा विभिन्न उपाय किए गए हैं।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि सरकार ने ‘सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड’ में निवेशकों की रुचि की समीक्षा की है। उन्होंने बताया कि ‘सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड’ सरकारी बॉण्ड होते हैं।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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