संभल शाही जामा मस्जिद विवाद: पक्षकार बनने के लिए कोर्ट में नई याचिका दायर

संभल। जनपद संभल की शाही जामा मस्जिद मामले में महंत ने पक्षकार बनने की याचिका दायर की साथ ही याचिका में नमाज पर रोक लगाने की भी मांग की। जनपद संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले की सुनवाई संभल स्थित जिला अदालत चंदौसी सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह की कोर्ट में चल रहा है जहां आज संभल की गुन्नौर तहसील के जुनावई के विश्व सिद्ध पीठ दुर्गादास मणि के महंत रमाकांत पुरी महाराज द्वारा अपने को पक्षकार बनने की याचिका दायर की गई साथ ही मांग की गई कि उक्त हरिहर मंदिर में नमाज पर रोक लगाई जाए या हिंदुओं को भी पूजा की अनुमति दी जाए ।
वहीं इस मामले में महंत के अधिवक्ता विक्रम सिंह चौहान ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि संभल की शाही जामा मस्जिद जो कि हरिहर मंदिर है जिसके चलते आज मैंने महंत रमाकांत पुरी महाराज की तरफ से सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह की अदालत में एक याचिका दायर की है जिसमें उन्हें पक्षकार बनाए जाने की मांग है क्योंकि महाराज जी महंत हैं। उन्हें ग्रंथों का ज्ञान भी है । इसके अलावा हमारी मांग यह भी है कि जब हरिहर मंदिर को माननीय अदालत ने विवादित ढांचा माना है फिर वहां नमाज की अनुमति क्यों है । वहां नमाज पर रोक लगाई जाए । यदि रोक नहीं लगे तो हिंदू समाज को भी वहां पूजा की अनुमति दी जाए।
संभल की गुन्नौर तहसील के जुनावई में स्थित विश्व सिद्ध पीठ दुर्गा दास मणि के महंत रमाकांत पुरी महाराज ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि संभल का हरिहर मंदिर ढांचे के रूप में बना हुआ है कोर्ट में सुनवाई हो रही है ,जो ढांचा है, उसमें नमाज होती है । उससे सनातनियों और हिंदुओं की भावनाएं आहत होती हैं। इसीलिए वहां पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाए यदि रोक न लगे तो वहां हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी जाए साथ ही इस मामले में पक्षकार बनाने के लिए भी चंदौसी की सिविल जज सीनियर डिवीज़न आदित्य सिंह की कोर्ट में आवेदन दिया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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