NDRF की जूली ने संकेत दिया इमारत में बच्ची जिंदा है, रोमियो ने किया कंफर्म, 6 साल की बैरन को मिली नई जिंदगी
https://youtu.be/MKm94whohJE गाजियाबाद। ऑपरेशन दोस्त के दौरान एनडीआरएफ की तीन टीमों द्वारा टर्की में विनाशकारी भूकंप में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त होने के बाद एनडीआरएफ की टीमों का अपने देश भारत वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। एनडीआरएफ की पहली टीम टर्की से सुबह 9:00 बजे हिंडोन एयर बेस पहुंची जबकि दूसरी […]
https://youtu.be/MKm94whohJE
गाजियाबाद। ऑपरेशन दोस्त के दौरान एनडीआरएफ की तीन टीमों द्वारा टर्की में विनाशकारी भूकंप में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त होने के बाद एनडीआरएफ की टीमों का अपने देश भारत वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है।
एनडीआरएफ की पहली टीम टर्की से सुबह 9:00 बजे हिंडोन एयर बेस पहुंची जबकि दूसरी टीम तकरीबन 11:00 बजे हिंडोन एयर बेस आई। देश वापस लौटने के बाद एनडीआरएफ के जांबाज जवानों का कमला नेहरू नगर स्थित एनडीआरएफ की आठवीं बटालियन में टर्की से रेस्क्यू करके वापस आने पर बहुत ही धूमधाम से स्वागत किया गया।
ऑपरेशन दोस्त के तहत एनडीआरएफ की टीमों द्वारा तकरीबन 83 शवों को निकाला गया जबकि दो लोगों को जीवित रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एनडीआरएफ की टीमों ने 34 वर्ग साइट्स को क्लियर किया। वर्क साइट क्लियर करने का मतलब है कि इस बात का एनडीआरएफ की टीमों द्वारा क्लियरेंस दिया गया कि संबंधित क्षेत्र में कोई जीवित या मृत मौजूद नहीं है। सभी को निकाल लिया गया है।
ये भी पढ़ें गाजियाबाद पुलिस की बड़ी उपलब्धि: डेढ़ करोड़ के 555 मोबाइल बरामद कर मालिकों को लौटाए, खिले चेहरेरेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने 6 वर्षीय बैरन और 8 वर्षीय मरय करत को जीवित रेस्क्यू किया. एनडीआरएफ की दूसरी बटालियन की टीम को लीड कर रहे रेस्क्यू कमांडेंट वी एन पराशर के मुताबिक उनकी टीम ने दो लोगों को जीवित रेस्क्यू किया और 24 शवों को मलबे से बाहर निकाला गया।
टर्की में ठंड अधिक थी तकरीबन -4 डिग्री टेंपरेचर था ऐसे में पूरी तैयारी के साथ टीमें यहां से रवाना हुई थी. टर्की में रेस्क्यू करने गई एनडीआरएफ टीम को विशेष कपड़े उपलब्ध कराए गए थे। जिससे कि ठंड के मौसम में जवान आसानी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला सके।
वी एन पाराशर सेकंड कमांडेंट, पराशर बताते हैं कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टीम ने 6 वर्षीय बैरन को जब बाहर निकाला तो बैरन अपनी मां की गोद में लिपटी हुई थी। बच्ची को जब मां की गोद से बाहर निकाला गया बच्चे की आंखें हल्की-हल्की खुलने लगी। बच्ची की मां मृत थी।
बच्ची को आँखे झपकते हुए देखा तो बहुत प्रसन्नता हुई कि हम एक मासूम बच्ची का जीवन को बचाने में सफल हुए। वी एन पाराशर की टीम में कुल 50 जवान शामिल थे।
6 वर्षीय बैरन और 8 वर्षीय मरय करत की जिंदगी बचाने में एनडीआरएफ के रेस्क्यू डॉग्स ने अहम भूमिका निभाई है. डॉग हैंडलर कांस्टेबल कुंदन कुमार के मुताबिक टीम को टर्की में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए दूसरा दिन था। रेस्क्यू साइट पर रेस्क्यू डॉग लेकर पहुंचे थे।
स्थानीय लोगों का कहना था कि रेस्क्यू साइट पर लाइव विक्टिम होने की संभावना है। छह मंजिला इमारत थी जिसमें रेस्क्यू डॉग जूली को छोड़ा गया। डॉग जूली ने इमारत में लाइव विक्टिम होने के संकेत दिए। जूली द्वारा दिए गए संकेत को कंफर्म करने के लिए रेस्क्यू डॉग रोगियों को भेजा गया।
रेस्क्यू डॉग रोमियो ने कंफर्म किया कि ध्वस्त इमारत में लाइव व्यक्ति मौजूद है। जिसके बाद अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और सफल ऑपरेशन चलाकर इमारत में से 6 वर्ष की बच्ची को जीवित बाहर निकाला गया।
एनडीआरएफ की आठवीं बटालियन के कमांडेंट पीके तिवारी ने बताया जो टीमें की में ग्राउंड पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी।
टीमों को जो भी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान परेशानियां होती थी वह हमारे साथ साझा करते थे और उसका तुरंत समाधान किया जाता था। एनडीआरएफ की टीमें इक्विपमेंट, राशन, कपड़े आदि साथ लेकर गई थी। जिससे कि हमारी टीम में किसी पर बोझ ना बने।
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