गाजियाबाद के जिलाधिकारी का अनोखा अंदाज, बाइक पर सवार होकर किसानों के बीच पहुंचे और खत्म कराया धरना
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में सोमवार को प्रशासन और किसानों के बीच एक अलग ही तालमेल देखने को मिला। जिले के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ अपनी सरकारी गाड़ी और काफिला छोड़कर एक बाइक पर सवार होकर सीधे मोदीनगर के तलहेटा गांव में चल रहे किसानों के धरनास्थल पर पहुंच गए। बिना किसी तामझाम और औपचारिकता के डीएम को अपने बीच पाकर किसान हैरान रह गए और उनके इस सहज व्यवहार से प्रभावित होकर घंटों से चल रहा गतिरोध कुछ ही देर में समाप्त हो गया।
तलहेटा गांव के पास दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर उतार चढ़ाव और मुआवजे से जुड़ी मांगों को लेकर किसान पिछले दो दिनों से भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में धरने पर बैठे थे। किसानों का आरोप था कि सड़क निर्माण के दौरान उनकी जमीन से मिट्टी तो उठाई गई लेकिन भराव का कार्य ठीक से नहीं हुआ। जिलाधिकारी ने बाइक पर बैठकर किसानों के साथ मौके का मुआयना किया और मौके पर मौजूद एजेंसी कर्मियों को फटकार लगाते हुए तुरंत भराव कार्य दुरुस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि बिना मुआवजा दिए किसी भी किसान की जमीन पर कब्जा न लिया जाए।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ के इस रुख के बाद भाकियू नेताओं और किसानों ने संतुष्टि जताते हुए धरने को स्थगित करने का ऐलान कर दिया। किसानों ने कहा कि पहली बार किसी अधिकारी ने जमीन पर आकर उनकी समस्याओं को इतनी संवेदनशीलता के साथ सुना है। दो हजार तेरह बैच के आईएएस अधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ इससे पहले प्रयागराज में महाकुंभ दो हजार पच्चीस का सफल आयोजन करा चुके हैं और अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।
इससे पूर्व भी जिलाधिकारी द्वारा एक गरीब किसान का बिजली बिल निजी कोष से भरने जैसे मानवीय कदम उठाए जा चुके हैं। जयपुर के रहने वाले रविंद्र कुमार मांदड़ पूर्व में रामपुर और जौनपुर जैसे जिलों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासन के इस संवेनदशील रवैये की पूरे जनपद में चर्चा हो रही है क्योंकि इससे न केवल एक बड़े आंदोलन को टालने में मदद मिली बल्कि सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद भी स्थापित हुआ।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

टिप्पणियां