राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस 2026: ड्राइवरों को मिलेगा “पायलट” का सम्मान, सड़क सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
नई दिल्ली। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (ए.आई.एम. टी. सी. ) के आह्वान पर राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर पर भव्यता, गरिमा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों एवं शहरों में ए.आई.एम. टी. सी. से संबद्ध तथा स्थानीय परिवहन संगठनों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें ड्राइवर भाइयों के अतुलनीय योगदान को नमन करते हुए उनके प्रति सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर डॉ. हरीश सभरवाल ने चालक भाइयों को “सड़क का सच्चा प्रहरी” बताते हुए कहा कि “सुरक्षित भारत की नींव सुरक्षित और जागरूक ड्राइवरों पर ही टिकी है।”
डॉ. सभरवाल ने कहा कि जब पूरा देश सो रहा होता है, तब हमारे ड्राइवर भाई देश की सीमाओं से लेकर हर घर की रसोई तक आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाने में सतत जुटे रहते हैं। तपती धूप, कड़ाके की ठंड, बारिश और तूफानों की परवाह किए बिना, अपनों से दूर रहकर वे भारत की अर्थव्यवस्था के पहियों को निरंतर गति देते हैं।
उन्होंने बताया कि ए.आई.एम. टी. सी. देश की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी परिवहन संस्था है, जो कार्गो और पैसेंजर—दोनों सेगमेंट का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान में संस्था से लगभग 95 लाख ट्रक ऑपरेटर, 16 लाख बस ऑपरेटर, 3500 ट्रांसपोर्ट संस्थाएं और करीब 40 लाख ड्राइवर जुड़े हुए हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में लगभग 50 लाख ड्राइवरों की भारी कमी है, जिसका एक प्रमुख कारण इस पेशे में घटता सामाजिक सम्मान है।
इसी पृष्ठभूमि में ए.आई.एम. टी. सी. ने राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि अब ड्राइवरों को हवाई जहाज़ के पायलट के समकक्ष सम्मान दिया जाएगा और उन्हें “ड्राइवर” के स्थान पर “पायलट” अथवा “कप्तान” कहे जाने की पहल की जाएगी। साथ ही, ड्राइवरों के लिए सम्मानजनक वर्दी और कैप उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. सभरवाल ने बताया कि ए.आई.एम. टी. सी. चालक भाइयों और बहनों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार के साथ निरंतर संवाद कर रही है। संस्था ड्राइवर्स सामाजिक सुरक्षा कल्याण बोर्ड के गठन, प्रधानमंत्री आवास योजना (पी.एम. ए. वाई.) में ड्राइवरों की भागीदारी, तथा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत ₹5 लाख तक के निःशुल्क इलाज को सुनिश्चित कराने हेतु प्रयासरत है। इसके अतिरिक्त, श्रम कानूनों के अंतर्गत ई.इस.आई. और पी.एफ. जैसी सुविधाएँ ड्राइवरों तक पहुँचाने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।
ड्राइवर भाइयों की सुविधा और सुरक्षा के लिए ए.आई.एम. टी. सी. ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रत्येक 50 किलोमीटर पर सुरक्षित पार्किंग, स्वच्छ भोजन और ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था की माँग दोहराई। उन्होंने बताया कि दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर पर लगभग 300 ऐसी सुविधाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। साथ ही, ए. एस. डी. सी. के सहयोग से देश के 800 जिलों में निःशुल्क प्रशिक्षण और एक विशेष एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज की व्यवस्था की जा रही है। भारत एसोसिएशन ऑफ रोड सेफ्टी वॉलिंटियर्स के साथ मिलकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और नशामुक्ति के लिए भी निरंतर अभियान चलाया जा रहा है।
डॉ. सभरवाल ने सभी परिवहन साथियों और देशवासियों से अपील की, कि वे ड्राइवर भाइयों को सम्मान दें और सड़क सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएँ।
उन्होंने कहा—“जब मेरा ड्राइवर भाई सुरक्षित और सम्मानित होगा, तभी भारत वास्तव में सुरक्षित होगा।”
न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से
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लेखक के बारे में
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