दिल्ली की सड़कों से हटाए जाएंगे मियाद पूरी कर चुके वाहन, परिवहन विभाग के आदेश पर शुरू हुआ अभियान

नई दिल्ली। अपनी मियाद पूरी कर चुके वाहन अब दिल्ली की सड़कों से हटाए जा रहे हैं। जिन वाहनों की मियाद निकल चुकी है, ऐसे वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग ने यातायात पुलिस व एमसीडी के साथ मिलकर वाहनों के जब्तीकरण का अभियान शुरू किया है। दिल्ली में जनवरी तक करीब […]
नई दिल्ली। अपनी मियाद पूरी कर चुके वाहन अब दिल्ली की सड़कों से हटाए जा रहे हैं। जिन वाहनों की मियाद निकल चुकी है, ऐसे वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग ने यातायात पुलिस व एमसीडी के साथ मिलकर वाहनों के जब्तीकरण का अभियान शुरू किया है।
दिल्ली में जनवरी तक करीब 54 लाख वाहन ऐसे हैं जिनकी मियाद पूरी हो चुकी है। राजधानी की सड़कों से ऐसे 54 लाख वाहनों को हटाया जाएगा।
गौरतलब है कि दिल्ली में 10 साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल, सीएनजी वाहनों को सड़क पर चलने की मंजूरी नहीं है। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों का डाटा तैयार कर लिया है। राजधानी दिल्ली में करीब 54 लाख वाहन ऐसे हैं जो अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं।
दिल्ली की किसी भी 60 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर कोई ऐसा वाहन खड़ा मिलता है, तो उस पर यातायात पुलिस और एमसीडी कार्रवाई करेगी। प्रवर्तन टीम ने इस संबंध में कार्रवाई भी शुरू कर दी है। 3 दिनों की कार्रवाई में करीब 150 वाहनों को जब्त कर के स्क्रेप करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आपको बता दें कि सार्वजनिक स्थान पर वाहन खड़ा मिलने पर उसे जब्त किया जाएगा। पुराना वाहन सड़क पर चलते हुए पकड़ा गया तो चालान के साथ उसे जब्त किया जाएगा। 60 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर पुराना वाहन खड़ा मिलता है तो उसे भी जप्त किया जाएगा।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां