कैराना का 'किंग' कौन ? महा-सर्वे के चौंकाने वाले नतीजे: इकरा हसन के 'जोश' के आगे प्रदीप चौधरी का 'अनुभव' कितना भारी ?, या कोई तीसरा बना जनता की पसंद, जाने पूरा परिणाम !

कैराना/शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीटों में शुमार कैराना का सियासी मिजाज भांपने के लिए 'रॉयल बुलेटिन' द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए महा-सर्वे ने हलचल पैदा कर दी है। हजारों की रीच और सैकड़ों कमेंट्स के बीच जनता ने अपनी जो राय रखी है, वह आने वाले समय में इस पूरे इलाके में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। सर्वे में मुख्य मुकाबला वर्तमान सांसद इकरा हसन और पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी के बीच दिखा, जिसमें युवा जोश और संसदीय सक्रियता को लेकर जनता का रुख काफी स्पष्ट नजर आया।
सोशल मीडिया पर लोगों की राय को देखने पर पता चलता है कि बड़ी संख्या में यूज़र्स ने वर्तमान सांसद इकरा हसन के पक्ष में अपनी राय रखी, जबकि कुछ लोगों ने पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी के अनुभव को बेहतर बताया। वहीं कुछ कमेंट ऐसे भी रहे जिनमें दोनों नेताओं पर सवाल उठाए गए या किसी अन्य विकल्प की बात की गई।
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कई यूज़र्स ने कमेंट में लिखा कि इकरा हसन एक शिक्षित और युवा सांसद हैं जो संसद में क्षेत्र के मुद्दे उठा रही हैं। कुछ लोगों ने उनकी संसद में उपस्थिति, युवाओं से जुड़ाव और सोशल मीडिया पर सक्रियता को उनकी ताकत बताया। कई समर्थकों ने उन्हें कैराना की लोकप्रिय नेता बताते हुए भविष्य में भी मजबूत भूमिका निभाने की बात कही।
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वहीं दूसरी ओर कुछ यूज़र्स ने प्रदीप चौधरी के पक्ष में कमेंट करते हुए उनके अनुभव और पुराने राजनीतिक प्रभाव का जिक्र किया। समर्थकों का कहना था कि लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वे क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं।
कुछ लोगों ने उठाए सवाल
कमेंट सेक्शन में कुछ यूज़र्स ऐसे भी रहे जिन्होंने दोनों नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि जनता को सिर्फ चेहरे नहीं बल्कि काम चाहिए। कुछ लोगों ने तीसरे विकल्प की भी बात की।
कमेंट्स का दंगल: क्या कहती है कैराना की आवाज़?
सोशल मीडिया पर छिड़ी इस बहस में इकरा हसन की समर्थक लहर साफ दिखी।
- विकास शर्मा ने लिखा कि युवा सांसद इकरा हसन संसद में खूब मुद्दे उठाती है, इन्होने शामली से माता वैष्णो देवी के लिए सीधी ट्रेन की मांग भी की थी ,पढ़ी लिखी समझदार है, मिलन सार है, जहाँ जरुरत है वहां ख़डी मिलती है, इस पर अदिति चौधरी, निधि अग्रवाल, अब्दुल गफ्फार, मिथलेश शर्मा, पायल बिंदल, चौधरी जाबिर हसन, और अनीता शर्मा ने भी उनकी बात का समर्थन किया।
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इमरान खान और मोहम्मद आरिफ जैसे सक्रिय यूजर्स ने इकरा हसन को 'बेस्ट डेब्यू सांसद' अवार्ड मिलने और उनकी 90% से अधिक उपस्थिति को सबसे बड़ा प्लस पॉइंट बताया।
- सोनिका त्यागी भी मानती है कि इकरा हसन ने कैराना में काम तो किया है।
- नीरज मेहरा, नैना देवी- इकरा आसान बहुत अच्छी नेता है।
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शिवम कुमार और नावेद सिद्दीकी ने उनकी शिक्षा और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ की सराहना की।
अनुभव और स्थिरता के नाम पर प्रदीप चौधरी भी रेस में बरकरार हैं।
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जुबैर शमीम, अंजनी कुमार और शाहरुख जसौई ने प्रदीप चौधरी के अनुभव को कैराना के लिए जरूरी बताया।
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प्रदीप त्यागी और सागर खटाना जैसे समर्थकों का मानना है कि सत्ता पक्ष में होने के नाते प्रदीप चौधरी ही विकास के कार्यों को गति दे सकते हैं।
- रोहताश कुमार फौजदार -मानते है कि प्रदीप चौधरी बहुत अच्छे हैं !
तीखे सवाल और विरोध का सुर: सर्वे में कुछ ऐसे कमेंट्स भी आए जिन्होंने राजनीति की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए।
सुंदरपाल चौहान और राजीव कुमार मलिक ने सीधे तौर पर पूछा कि इकरा हसन के परिवार के कई सदस्यों के सांसद रहने के बावजूद क्षेत्र में क्या ठोस उपलब्धि रही ? वहीं, राहुल सैन ने दोनों ही पक्षों को 'जीरो' बताते हुए जनता की निराशा को व्यक्त किया।
कमल शर्मा ने लिखा- एक सत्ता पक्ष में रहते हुए रहे हैं और एक विपक्ष में है, तुलना करना ठीक नहीं, दोनों अलग है, दोनों के पास ताकत बराबर नहीं है।
नीतू चौधरी, पीके गुर्जर और प्रमोद कुमार ने तो इन दोनों को ही नकारते हुए मनीष चौहान को बेहतर नेता बता दिया।
आंकड़ों की ज़ुबानी: किसका पलड़ा भारी?
प्राप्त कमेंट्स के सूक्ष्म विश्लेषण के बाद जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं, वे राजनीतिक पंडितों को हैरान कर सकते हैं:
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इकरा हसन (पक्ष): सर्वे में 64% कमेंट्स इकरा हसन के पक्ष में आए। समर्थकों का मानना है कि लंदन से शिक्षित उनकी नई पीढ़ी की राजनीति और संसद में गन्ने के भुगतान जैसे मुद्दों पर उनकी मुखरता उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
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प्रदीप चौधरी (पक्ष): पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी को 25% लोगों ने अपनी पसंद बताया। उनके समर्थकों ने उनकी सादगी, भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था और उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को जीत का आधार माना।
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तटस्थ एवं अन्य: करीब 11% लोग ऐसे रहे जिन्होंने दोनों ही चेहरों पर अविश्वास जताया या 'मनीष चौहान' जैसे नए विकल्पों की बात की। कुछ लोगों ने इसे केवल जातिगत राजनीति का हिस्सा बताते हुए विकास की कमी पर नाराजगी जताई।
सोशल मीडिया बनाम जमीनी राजनीति
हालांकि यह विश्लेषण केवल सोशल मीडिया पर आए कमेंट्स के आधार पर है, इसलिए इसे पूरी जनता की राय नहीं माना जा सकता। लेकिन इतना जरूर है कि ऑनलाइन चर्चा में फिलहाल युवा नेतृत्व को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।
कुल मिलाकर कैराना की राजनीति में ‘युवा जोश बनाम अनुभव’ की बहस अभी भी जारी है और आने वाले समय में जनता किसे ज्यादा पसंद करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
नामों की सूची (जिन्होंने इस मंथन में भाग लिया):, अंजनी कुमार, मुस्तकीम अंसारी, नावेद सिद्दीकी, चौधरी जाबिर हसन, इमरान खान, कमल शर्मा, अब्दुल गफ्फार, फहीम गुर्जर, चंद्रशेखर, शंकर कश्यप, आशु चौधरी, अभी चौधरी, जावेद चौधरी, पुनीत भाटिया, जुल्मी ठाकुर, नावेद आलम, आस मोहम्मद, दिलीप कलश्यान, फरहान गौर, जुबैर शमीम, नीतू चौधरी, अरमान खान, प्रदीप त्यागी, अफजल सिद्दीकी, सागर खटाना, सचिन गोयल, प्रमोद कुमार, अभिषेक कौशिक, प्रविंद्र पंवार, नासिर चौधरी, कादिर चौहान, एन मित्तल, वसीम राणा, विकास शर्मा, परवाश अली, अब्दुलसमद, राहुल सैन, पीके गुर्जर, गुर्जर अरविंद चौहान, राजीव कुमार मलिक, मोहम्मद दिलशाद, काजी मुस्तकीम, शविखान, सचिन देव, शिवम मुखिया, स्नेह सैनी, गुलशन चौधरी, राव बाबर, मन्नू गुर्जर, राणा जीशान, शाहरुख जसौई, अजय वत्स, वाजिद सिद्दीकी, तेजस सैनी, एमडी हुसैन, निजाम अंसारी, मोहम्मद आरिफ, कपिल ताड़िया, अजय चौधरी, शाहनवाज त्यागी, अमीर आजम, शब्बीर खान, अब्दुल वहाब, आर सिद्दीकी, रिजवान गुर्जर, शोएब तोमर, गुलाब जीके, मोहम्मद तुर्राब, डॉ. नासिर, गौरव जाट, जावेद खान, एमडी इनाम, मोहम्मद शाकिर, कविंद्र सिंह, विशाल गगनियां, तौसीफ चौहान, आसिफ गुर्जर। पूरा सर्वे देखें -
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