नोएडा। ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने ऑनलाइन गैमिंग एप/ऑनलाइन गैंबलिंग के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 युवतियां समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 18 मोबाइल, 4 लैपटॉप, 155 प्रयोग शुदा फर्जी सिम, 50 पेमेन्ट क्यूआर कोड़, 45 हजार रुपये नकद, 2 कम्प्यूटर मॉनीटर, 4 वाई-फाई माडम, 10 पेज डाटाशीट व 10 कॉलिंग हेडफोन बरामद की है।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि थाना बिसरख पुलिस द्वारा लोकल इंटेलिजेंस व गोपनीय सूचना की सहायता से ऑनलाइन गैमिंग एप/ऑनलाइन गैंबलिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अभियुक्त गर्व पुत्र राजकुमार चौहान, अजय सिहं पुत्र रामेश्वर सिंह, सोनल उर्फ अनिरुद्ध पुत्र राजेंद्र व अभियुक्ता रुचि पुत्री अशोक, कोमल पुत्री सुनील सिंह, सुषमा पुत्री दिलवर रावत तनीषा पुत्री विशाल मित्तल, सानिया सिंह पुत्री कमल प्रताप को चौथी मंजिल, गौर सिटी सेन्टर निकट चार मूर्ति चौराहा से गिरफ्तार किया है।
उन्होंनेे बताया कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रूलेट और नंबरिंग गेम जैसे खेल खिलवाते थे। शुरुआत में ग्राहकों को छोटी-छोटी रकम जितवाकर उनका भरोसा और लालच बढ़ाया जाता था। जैसे ही ग्राहक अधिक धनराशि लगाने लगता, खेल का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उसे लगातार हरवाया जाता और उसकी जमा पूंजी डुबो दी जाती थी। यदि कोई ग्राहक जीतकर रकम निकालने की बात करता तो उसे तकनीकी बहानों से टाल दिया जाता या बड़ी राशि की शर्त लगाकर भुगतान रोका जाता था। ज्यादा दबाव बनाने पर ग्राहकों को ब्लॉक कर दिया जाता और पूरी रकम हड़प ली जाती थी।
गिरोह फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर सिम कार्ड खरीदता था। उन्हीं सिम कार्डों पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। ग्राहकों से पैसे इन्हीं खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से ट्रांसफर कराए जाते थे। बरामद सिम कार्ड प्री-एक्टिवेटेड थे, जिन्हें अलग-अलग राज्यों के पते दिखाकर लिया गया था। पुलिस को इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक सहित कई बैंकों के खातों की डिटेल मिली है, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों के लेनदेन में किया जाता था।
वहीं एसीपी सेंट्रल नोएडा दीक्षा सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी सोनल उर्फ अनिरुद्ध ने पूछताछ में बताया कि वह कॉलिंग और डाटा मैनेजमेंट का काम देखता था। वह ऐसे लोगों का डाटा जुटाता था जिन्होंने पहले कभी ऑनलाइन गेम खेले हों या इस तरह के विज्ञापनों में रुचि दिखाई हो। इसके बाद कॉलिंग स्टाफ उन लोगों को फोन कर अधिक कमाई का लालच देता था। नए ग्राहकों को लुभाने के लिए बोनस और फ्री गेम की सुविधा भी दी जाती थी, जिसे निकाला नहीं जा सकता था। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के लेनदेन की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि ऑनलाइन गेमिंग या निवेश के नाम पर मिलने वाले लालच से बचें। किसी भी अनजान ऐप या लिंक पर पैसे लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच जरूर करें।