Nashik Civic Polls: गिरीश महाजन के सामने शिवसेना पस्त, नासिक में खिला 'कमल'
नासिक। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव से पहले दूसरी पार्टियों के नेताओं के बड़े पैमाने पर अपनी पार्टी में शामिल होने का फायदा मिलने के बावजूद शिवसेना नासिक नगर निगम में सत्ता बनाए रखने में नाकाम रही, जिससे निगम में पार्टी के रवैये और प्रभाव पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन के नेतृत्व में शानदार प्रदर्शन करते हुए नासिक नगर निगम में 72 सीटें जीतीं। पार्टी ने सीटों की संख्या 57 से बढ़ाकर 72 कर ली, जिससे उसे स्पष्ट बहुमत मिला।
इस निर्णायक जनादेश के साथ भाजपा स्वतंत्र रूप से सत्ता में लौट आयी। यह एक ऐसा घटनाक्रम है जो आने वाले कार्यकाल में नगर निगम के कामकाज को काफी प्रभावित करेगा। इसके विपरीत, शिवसेना का सिर्फ़ 26 सीटें जीत पाना पार्टी के लिए आगे आने वाली संभावित राजनीतिक चुनौतियों का संकेत है। राज्य स्तर पर सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद शिवसेना ने चुनावों में अकेले लड़कर नासिक नगर निगम पर नियंत्रण करने का अपना इरादा ज़ाहिर किया था। सत्ता की उम्मीद में कई पूर्व पार्षद और अनुभवी स्थानीय नेता पार्टी में इस उम्मीद से शामिल हुए कि उन्हें सरकार से नज़दीकी का फायदा मिलेगा। भाजपा के भारी बहुमत ने शिवसेना की सत्ता पर कब्ज़ा करने या नागरिक प्रशासन में निर्णायक भूमिका निभाने की महत्वाकांक्षाओं को तोड़ दिया है।
हालांकि, भाजपा के भारी बहुमत ने शिव सेना गुट की सत्ता पर कब्जा करने या नगर निगम प्रशासन में निर्णायक भूमिका निभाने की महत्वाकांक्षाओं को चकनाचूर कर दिया है। नतीजतन, शिवसेना (शिंदे गुट) अब नगर निगम में किसी भी भूमिका के लिए भाजपा की सद्भावना पर निर्भर हो गई है। अब विधानसभा और नगर निगम दोनों जगह भाजपा के मज़बूती से सत्ता में होने के कारण महाराष्ट्र का राजनीतिक समीकरण काफी बदल गया है। खास बात यह है कि आने वाले कुंभ मेले की योजना और क्रियान्वयन पूरी तरह से भाजपा के नियंत्रण में है। जल संसाधन मंत्री महाजन ने इस प्रक्रिया में दूसरी पार्टियों के नेताओं को शामिल नहीं किया है, जो भाजपा के दबदबे को दर्शाता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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