नागपुर में दंगों के आरोपित की पत्नी ने जीता एनएमसी का चुनाव..आलिशा फहीम खान एआईएमआईएम के टिकट पर विजयी

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नागपुर। नागपुर महानगर पालिका के उत्तर नागपुर स्थित प्रभाग क्रमांक 3(ड) से एनएमसी के चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की उम्मीदवार आलिशा (लिशा) फहीम खान ने जीत दर्ज की। वे नागपुर दंगों के प्रमुख आरोपितों में से एक और वर्तमान में जमानत पर रिहा फहीम खान की पत्नी हैं। इस प्रभाग से एआईएमआईएम के कुल 3 उम्मीदवार विजयी हुए हैं। वहीं, समीपवर्ती प्रभाग क्रमांक 6 में मुस्लिम लीग के चारों उम्मीदवारों के चुने जाने से उत्तर नागपुर के राजनीतिक समीकरणों पर पूरे राज्य का ध्यान केंद्रित हो गया है।
राज्य में औरंगजेब की कब्र को लेकर दिए गए बयानों के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण माहौल का असर नागपुर पर भी पड़ा था। पवित्र आयत के कथित अपमान के बाद भड़की प्रतिक्रियाएं आगे चलकर दंगों में बदल गईं। मार्च 2025 में महाल क्षेत्र में हुए इन दंगों के बाद फहीम खान को 4 महीनों के लिए जेल भेजा गया था। इसके बाद पुलिस और महानगरपालिका प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए खान परिवार के दो मंज़िला मकान को बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया था।
इस पृष्ठभूमि में, मात्र कुछ ही महीनों के भीतर आलिशा खान ने राजनीति में सक्रिय कदम रखते हुए नागपुर महानगरपालिका का चुनाव लड़ा। प्रचार के दौरान उन्होंने प्रशासन की भूमिका की तीखी आलोचना की तथा प्रभाग की बुनियादी नागरिक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने कहा था, “घर गिराने के मामले में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन हमारे इलाके की समस्याएं वर्षों से लंबित हैं।”
उन्होंने पीली नदी के किनारे स्थित बस्तियों में हर मानसून में होने वाले जलभराव, अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था, जर्जर या बंद पड़ी सरकारी स्कूलों, झुग्गी-बस्तियों के नियमितीकरण और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आपात स्थिति में मरीजों को आठ किलोमीटर दूर स्थित मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है, जिससे देरी के कारण जान का खतरा पैदा होता है।
जीत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए आलिशा खान ने कहा कि 17 मार्च के बाद उनके जीवन ने एक नया मोड़ लिया। पति के कारावास ने उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की ताकत दी। उनकी इस जीत से नागपुर की राजनीति में नई चर्चाओं की शुरुआत हो गई है और आने वाले समय में उनकी भूमिका पर पूरे राज्य की नजर बनी रहेगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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