नीतीश कटारा हत्याकांड: विकास यादव को सुप्रीम कोर्ट से फरलो, जेल के बाहर मनेगी होली
नई दिल्ली। नीतीश कटारा हत्याकांड में सजा काट रहे दोषी विकास यादव को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें होली के त्योहार पर परिवार के साथ समय बिताने के लिए फरलो की अनुमति दे दी है। विकास यादव कटारा हत्याकांड मामले में 25 साल की सजा काट रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश मे कहा है कि फरलो की अवधि खत्म होने के बाद विकास यादव को सरेंडर करना होगा। कोर्ट के फैसले के अनुसार, 7 मार्च शाम 5 बजे से पहले विकास यादव को जेल मे सरेंडर करना होगा। बता दें कि फरवरी 2002 में नीतीश कटारा की हत्या हुई थी। यह पूरा मामला ऑनर किलिंग से जुड़ा हुआ था। जानकारी के अनुसार, नीतीश कटारा की एक नेता डीपी यादव की बेटी के साथ दोस्ती थी और इसी को लेकर उसका अपहरण कर लिया गया और बाद में हत्या कर दी गई थी।
ये भी पढ़ें राष्ट्रपति ट्रंप ने एक साल में आए ऐतिहासिक बदलावों की प्रशंसा की, कांग्रेस में गिनाईं उपलब्धियांइस हत्या का आरोप नीतीश की दोस्त भारती के भाई विकास और विशाल पर लगा। विकास डीपी यादव का बेटा है। निचली कोर्ट ने इस हत्याकांड को ऑनर किलिंग माना और 30 मई 2008 को विकास एवं विशाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कटारा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि यादव जोड़ी को भारती के साथ उसका कथित रिश्ता पसंद नहीं था क्योंकि वे अलग-अलग जातियों के थे। हालांकि, बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के समय विकास यादव की उम्रकैद की सजा को 25 साल की सजा के रूप में बदल दिया था। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2016 में विकास यादव और विशाल यादव की 25-25 साल की कैद की सजा को बरकरार रखा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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