खतौली भाजपा में 'बगावत' की लहर: बाल्मीकि और वैश्य समाज ने खोला मोर्चा; बोले- 'बीजेपी को हमसे सिर्फ वोट और चंदा चाहिए, सम्मान नहीं'

खतौली (मुजफ्फरनगर)। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नगर पालिका परिषद खतौली और जनपद की विभिन्न नगर पंचायतों में नामित सभासदों की सूची जारी होते ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। भाजपा के 'कोर वोट बैंक' माने जाने वाले बाल्मीकि और वैश्य समाज ने अपनी घोर अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी नेतृत्व के खिलाफ तीखे तेवर अपना लिए हैं। वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा आलाकमान को चेतावनी दी है कि वे उन्हें 'बंधुआ मजदूर' समझने की भूल न करें।
प्रताप बाल्मीकि का तीखा हमला: "हमें बंधुआ वोट बैंक मानकर हो रहा शोषण"
जन्मजात भाजपाई और वरिष्ठ नेता प्रताप बाल्मीकि ने मुजफ्फरनगर, खतौली, शाहपुर, बुढ़ाना, जानसठ, मीरापुर और पुरकाजी की सूचियों में बाल्मीकि समाज की शून्य हिस्सेदारी पर गहरा रोष व्यक्त किया है।प्रताप बाल्मीकि ने प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि बाल्मीकि समाज भाजपा का हमेशा से समर्थक रहा है। जिसके चलते भाजपा आला कमान ने बाल्मीकि समाज को अपना बंधुआ वोट बैंक मानकर इसका शोषण करना शुरू कर दिया है।
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योग्यता पर सवाल: उन्होंने कहा कि क्या भाजपा को पूरे जनपद के बाल्मीकि समाज में एक भी व्यक्ति सभासद के योग्य नहीं मिला? जबकि बड़ी संख्या में समाज के लोग पार्टी की कार्यकारिणी में रात-दिन काम कर रहे हैं।
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आर-पार की लड़ाई: प्रताप बाल्मीकि ने समाज से आत्म-मंथन का आह्वान करते हुए कहा कि यदि समाज अब भी नहीं जागा, तो भविष्य में भी इसी तरह उपेक्षा होती रहेगी।प्रताप बाल्मीकि ने कहा कि अब समय आ गया है कि बाल्मीकि समाज भाजपा आला कमान के समक्ष अपनी आवाज उठाने के साथ ही शासन द्वारा नामित सभासदों की सूची में ना शामिल किए जाने पर अपना आक्रोश व्यक्त करे। अन्यथा भाजपा आला कमान द्वारा भविष्य में भी बाल्मीकि समाज को केवल अपना बंधुआ वोट बैंक मानकर इसकी अनदेखी जारी रखी जायेगी। उन्होंने दो टूक कहा, "जो समाज जीत दिला सकता है, वह उपेक्षा पर सबक सिखाने की ताकत भी रखता है।"
वैश्य समाज का आक्रोश: "सिर्फ दरी बिछाने और चंदा देने तक सीमित रह गए हम"
वहीं, अखिल भारतीय वैश्य महा संगठन खतौली के नगर अध्यक्ष अभिषेक गोयल एडवोकेट ने भी मोर्चा खोलते हुए जिला नेतृत्व पर 'योजनाबद्ध अनदेखी' का आरोप लगाया है।
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प्रतिनिधित्व शून्य: अभिषेक गोयल ने कहा कि खतौली में नामित 5 सभासदों में एक भी वैश्य समाज से नहीं है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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दौड़ से बाहर: उन्होंने आरोप लगाया कि मंडल से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेतृत्व की दौड़ में वैश्य समाज को साजिश के तहत बाहर रखा जाता है। भाजपा को वैश्य समाज से सिर्फ वोट और चंदा चाहिए, लेकिन जब पद देने की बारी आती है, तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। उन्होंने मांग की कि राष्ट्र निर्माण और आर्थिक विकास में वैश्य समाज के योगदान के अनुपात में उन्हें उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।
2027 से पहले 'अपनों' की नाराजगी बनी चुनौती
एक तरफ दलित वर्ग का अहम हिस्सा बाल्मीकि समाज और दूसरी तरफ पार्टी की रीढ़ माना जाने वाला वैश्य समाज—दोनों का एक साथ मुखर होना मुजफ्फरनगर भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि पार्टी ने समय रहते इन वर्गों को साधा नहीं, तो आने वाले चुनावों में इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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लेखक के बारे में
वरिष्ठ पत्रकार आरिफ सिद्दीकी पिछले 32 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार के एक अभिन्न स्तंभ हैं। मुज़फ्फरनगर के खतौली क्षेत्र की ज़मीनी समस्याओं और विकास के मुद्दों पर उनकी पकड़ बेमिसाल है। तीन दशकों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारिता करियर में उन्होंने हमेशा सत्य और निष्पक्षता का मार्ग चुना है। विश्वसनीय रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय विषयों पर उनकी गहरी समझ उन्हें क्षेत्र के सबसे अनुभवी पत्रकारों की श्रेणी में खड़ा करती है। खतौली की खबरों के लिए उनसे 9897846483 पर संपर्क किया जा सकता है।

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