“ट्रेन आएगी या चुनाव?” राजीव शुक्ला का तंज, रेल परियोजनाओं पर सियासी वार

नई दिल्ली/लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने देश में लंबित रेल परियोजनाओं और ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने अपने ताजा बयान में शुक्ला ने तंज कसते हुए पूछा है कि "जनता के पास पहले ट्रेन आएगी या अगला चुनाव?" उनके इस बयान ने रेल विकास के दावों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
परियोजनाओं की कछुआ चाल पर उठाए सवाल राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार बड़ी-बड़ी बुलेट ट्रेन और आधुनिक स्टेशनों की बातें तो करती है, लेकिन हकीकत में आम आदमी की पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं। उन्होंने कई ऐसी रेल परियोजनाओं का जिक्र किया जो सालों से अधर में लटकी हुई हैं। शुक्ला ने तंज कसते हुए कहा कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसे देखकर लगता है कि विकास की पटरी बिछने से पहले चुनाव की तारीखें करीब आ जाएंगी।
"आम आदमी की सवारी का बुरा हाल" कांग्रेस नेता ने भारतीय रेलवे की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि स्लीपर और जनरल कोच की संख्या कम की जा रही है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा:
"सरकार का ध्यान केवल चकाचौंध पर है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बुनियादी ढांचा अभी भी पिछड़ा हुआ है। जनता इंतजार कर रही है कि कब उनकी यात्रा सुगम होगी, लेकिन उन्हें सिर्फ चुनावी वादे मिल रहे हैं।"
विपक्ष का एकजुट प्रहार राजीव शुक्ला के इस बयान को विपक्ष के उस व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे सरकार को बुनियादी सुविधाओं और महंगाई के मुद्दे पर घेर रहे हैं। उन्होंने रेल बजट के अलग से पेश न होने और रेलवे के 'निजीकरण' की कोशिशों पर भी निशाना साधा। शुक्ला ने मांग की कि सरकार पीआर (PR) स्टंट के बजाय लंबित प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की समय सीमा तय करे।
भाजपा का पलटवार वहीं, राजीव शुक्ला के इस वार पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में रेलवे का जितना विस्तार और आधुनिकीकरण हुआ है, उतना पिछले 60 सालों में नहीं हुआ। भाजपा ने इसे विपक्ष की 'कुंठा' करार देते हुए कहा कि वंदे भारत जैसी ट्रेनें नए भारत की पहचान बन चुकी हैं।
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